
इंदौर। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में गंभीर लापरवाही ने एक बच्चे की जान ले ली तो दूसरा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। शनिवार को डेढ़ साल के एक बच्चे को छोटे से ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की बजाय बेहोश करने वाली गैस लगा दी गई। सर्जरी के पहले ही बच्चे की धड़कन रुक गई। बमुश्किल आधे घंटे की सर्जरी के बाद बच्चे को वार्ड में शिफ्ट हो जाना था, लेकिन अब वह बच्चा वेंटीलेटर पर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। एक दिन पहले भी इसी वजह से आठ साल के बच्चे की मौत हो चुकी है। घटना के बाद नया ओटी सील कर दिया गया है।
एमवाय अस्पताल के नए मॉड्यूलर पीडियाट्रिक ओटी में लगातार दूसरे दिन गंभीर हादसा हुआ। यहां शुक्रवार को पहली बार सर्जरी हुई थी। इसमें खंडवा के आठ साल के आयुष पिता गणेश की सर्जरी के दौरान मौत हो गई। मौत के पीछे एनेस्थीसिया का ज्यादा डोज माना जा रहा था, लेकिन दूसरे ही दिन शनिवार को फिर सर्जरी के दौरान एक बच्चे की हालत बिगड़ी। जावरा के डेढ़ साल के राजवीर पिता बालाराम प्रजापत की माइनर सर्जरी थी।
ओटी टेबल पर लेते ही चंद मिनटों में उसकी धड़कन रुकने लगी। इसी के साथ बच्चे की हालत अत्यंत गंभीर हो गई तो उसे वेंटिलेटर पर रखवा दिया गया। रात तक भी बच्चे को होश नहीं आ सका था। परिजन का आरोप है कि हमने हंसता-खेलता बच्चा डॉक्टरों को सौंपा था और दो घंटे बाद हमें मरणासन्ना हालत में बच्चा दिया।
अस्पताल प्रशासन ने माना कि गैस सप्लाई में गड़बड़ी, ओटी सील
लगातार दो हादसों के बाद अस्पताल प्रशासन ने पता किया तो डॉक्टरों के भी होश उड़ गए। गैस सप्लाई में जानलेवा गड़बड़ी सामने आई, जिस पाइप से ऑक्सीजन गैस आती है, उसमें नाइट्रस वाले पाइप जोड़ दिए गए थे। ओटी शुरू होने के बाद गैस सप्लाई कनेक्शन की जांच भी नहीं की गई। इसका खामियाजा दो बच्चों ने भुगता। गैस सप्लाई व कनेक्शन जोड़ने का काम पीडब्ल्यूडी के टेक्नीशियन राजेंद्र चौधरी ने किया था। यह गलती उसने मेडिकल कॉलेज में लिखित में स्वीकार भी कर ली। कॉलेज प्रशासन ने संयोगितागंज थाने में उसके खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की।
नाइट्रस और ऑक्सीजन गैस सप्लाई का कनेक्शन एक्सचेंज
गैस सप्लाई करने में गड़बड़ी हुई थी। आज तक हमने भी इस तरह की घटना कभी अस्पताल में नहीं देखी। इससे यह अंदाज लगाना मुश्किल था कि किस वजह से बच्चों की हालत बिगड़ रही है। घटना की जानकारी लगते ही टेक्नीशियन को बुलाया। जांच करने पर पता लगा कि नाइट्रस और ऑक्सीजन के कनेक्शन एक्सचेंज हो गए थे। टेक्नीशियन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही ओटी भी सील कर दिया गया है। आज होने वाले सभी ऑपरेशन दूसरी तारीखों में शिफ्ट कर दिए गए है। - डॉ. सुमित शुक्ला, प्रभारी अधीक्षक, एमवायएच
तकनीकी लापरवाही के कारण हुआ हादसा
गैस कनेक्शन का पूरा ठेका पीडब्ल्यूडी के पास था। यह पूरी घटना तकनीकी लापरवाही के कारण हुई है। लापरवाह टेक्नीशियन ने अपनी गलती स्वीकार ली है। इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज ने पुलिस थाने में भी दी है। इस गैस को चेक करना आसान नहीं है, क्योंकि उसका न रंग होता है, न खुशबू। घटना के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एमके राठौर, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर
ऐसे हुआ हादसा
दरअसल ऑपरेशन थिएटर में छत से दो पाइप लाइन आई हैं। इसमें नीले रंग के पाइप में नाइट्रस और सफेद रंग के पाइप में ऑक्सीजन सप्लाई होती है। दोनों गैस में न कोई रंग होता है और न ही उसकी अलग अलग खुशबू। पाइप का कलर देखकर ही डॉक्टर इसका उपयोग करते हैं। सप्लाई करने वाले टेक्नीशियन ने नीले पाइप में ऑक्सीजन और सफेद पाइप में नाइट्रस सप्लाई कर दिया, जो कि मरीज के लिए जानलेवा साबित हो गया।
वेंटीलेटर नहीं होने से दम तोड़ चुके कई बच्चे
वेंटीलेटर नहीं होने से 13 दिन में 7 बच्चों ने दम तोड़ दिया, वहीं पांच महीने में 70 बच्चों की मौत हो चुकी है। मीडिया में इसका खुलासा होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। यह पता लगा कि दो वेंटीलेटर दो महीने से ताले में बंद पड़े हैं। इस पर कमिश्नर ने फटकार भी लगाई, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ा।