
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा अब केवल निस्तारण का विषय नहीं रहेगा, बल्कि उससे उपयोगी और टिकाऊ उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे।
इंदौर की ग्राम पंचायत काली बिल्लोद स्थित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई में जल्द ही आधुनिक मशीनें स्थापित की जाएंगी, जिनकी मदद से प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरे को प्रोसेस कर टेबल, कुर्सियां, दरवाजे, खिड़कियां सहित कई उपयोगी वस्तुएं बनाई जाएंगी। इस पहल से जहां कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, वहीं ग्राम पंचायतों के लिए आय का नया स्रोत भी विकसित होगा।
काली बिल्लोद स्थित एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई में कचरे के निपटान के साथ रिसाइकलिंग की योजना तैयार की गई है।बीते माह केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की संयुक्त सचिव ऐश्वर्या सिंह ने इस इकाई का दौरा किया था।
उन्होंने प्लांट के संचालन, कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण और निपटान की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया तथा प्रस्तावित नई तकनीक और मशीनों की जानकारी लेकर इस पहल को सराहा था। जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ जैन ने उन्हें पूरे स्वच्छता मॉडल और प्रस्तावित नवाचारों से अवगत कराया। सीईओ जैन का कहना है कि काली बिल्लोद ईकाई में जल्द ही मशीने लगाई जाएंगी, इसकी प्रक्रिया की जा रही है।
परियोजना के तहत एग्लोमरेटर (डेंसिफायर), इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन, प्लास्टिक एक्सट्रूडर और पैलेटाइज़र जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इनके माध्यम से प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे के बेहतर प्रबंधन से स्वच्छता के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की पहल भी पूरी होगी।कचरे के पुनः उपयोग से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि पंचायतों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा ।
वर्तमान में काली बिल्लोद, रणमत बिल्लोद और सलमपुर ग्राम पंचायतों से प्रतिदिन डोर-टू-डोर कचरा संग्रहित कर इस इकाई तक पहुंचाया जाता है। यहां जैविक कचरे से खाद तैयार की जाती है, जबकि प्लास्टिक और अन्य ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाता है। नई मशीनों के शुरू होने के बाद इसी कचरे से उपयोगी फर्नीचर और निर्माण सामग्री तैयार होगी।
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