इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद अपराध क्यों बढ़े, शिकायतकर्ता को भटकना क्यों पड़ता है? हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा
कोर्ट ने शासन को यह नोटिस उस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें अपराध बढ़ने और पुलिस द्वारा शून्य पर कायमी नहीं करने का मुद्दा उठाया गया ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Jan 2026 08:32:11 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Jan 2026 08:37:55 PM (IST)
इंदौर हाई कोर्ट।नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद अपराध नियंत्रित होने के बजाय बढ़ क्यों रहे हैं। सीमा विवाद में उलझते हुए शिकायतकर्ताओं को भटकना क्यों पड़ता है। पुलिस मध्य प्रदेश शासन के 2017 के परिपत्र का पालन क्यों नहीं करती है। शासन को हाई कोर्ट में चार सप्ताह में जवाब देना है।
कोर्ट ने शासन को यह नोटिस उस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है, जिसमें अपराध बढ़ने और पुलिस द्वारा शून्य पर कायमी नहीं करने का मुद्दा उठाया गया है। पूर्व पार्षद महेश गर्ग की याचिका में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि डीजीपी के वर्ष 2017 के परिपत्र का पालन नहीं किया जा रहा है।
पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने के लिए यहां से वहां थाने-थाने भटकाया जाता है। जबकि सुप्रीम कोर्ट और शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि पीड़ितों को थाना सीमा विवाद में न उलझते हुए तुरंत शून्य पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जानी चाहिए।
पीड़ितों के भटकने से एफआईआर में देरी का आरोपितों को लाभ मिलता है। पुलिस की इस लापरवाही के चलते गंभीर अपराधों में साक्ष्य तक मिटा दिए जाते हैं।
तर्कों से सहमत होते हुए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने मुख्य सचिव गृह विभाग, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर इंदौर, थाना प्रभारी राजेंद्र नगर, विजय नगर, लसूड़िया को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।