
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा हटने से आम लोगों की प्राइवेसी खत्म होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। केंद्र शासन की ओर से उपस्थित हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से याचिका में जवाब देने के लिए समय मांगा है। कोर्ट में मामले को लेकर अब 17 अगस्त को अगली सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि इंस्टाग्राम ने अपने प्लेटफार्म से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा आठ मई से समाप्त करने के लिए सूचना जारी की है। इसके विरुद्ध अभिभाषक पार्थ शर्मा ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत की है।
आरोप है कि इससे जनता के डाटा के साथ ही निजता का उल्लंघन होगा। याचिका में उन्होंने अंदेशा जताया है कि इसके बाद इस साइट का उपयोग करने वालों के डेटा को इस प्लेटफार्म की मालिक कंपनी मेटा सहित अन्य भी देख सकेंगे। इससे निजता खतरे में पड़ जाएगी।
कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान मेटा कंपनी की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक कपिल सिब्बल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मेटा जो कि इंस्टाग्राम की पेरेंटल कंपनी है उसकी बनाई गई नई निजता नीति, कानून के तहत ही है।
नई नीति में ये तय किया गया है कि किसी तरह की कानून के खिलाफ गतिविधि होने, आपराधिक मामलों, स्मगलिंग, जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यदि सरकार जानकारी मांगेगी तो कंपनी सरकार को डेटा देगी। न की अन्य किसी को। नीति को लेकर गलत जानकारी कोर्ट के सामने रखी जा रही है।