Indore Abhishek Chendke Column: रेसीडेंसी कोठी का नाम भी बदलेगा क्या?
Indore Abhishek Chendke Column: वह तो अभी भी रेसीडेंसी कोठी ही कहलाती है और अंग्रेजों के जमाने की तोपों से लेकर कई निशानियां वहां आज भी सहेज कर रखी गई हैं। नाम कागजों पर तो बदल जाते हैं, लेकिन आम लोग आसानी से नहीं भूल पाते हैं।
By Sameer Deshpande
Edited By: Sameer Deshpande
Publish Date: Thu, 29 Sep 2022 02:41:00 PM (IST)
Updated Date: Thu, 29 Sep 2022 02:41:00 PM (IST)

Indore Abhishek Chendke Column अभिषेक चेंडके, इंदौर, नईदुनिया। यह सप्ताह स्थानों के नाम बदलने के नाम रहा। उज्जैन में महाकाल कारिडोर अब महाकाल लोक कहलाएगा तो शहर में रेसीडेंसी क्षेत्र अब महाराणा बख्तावर सिंह के नाम से जाना जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपनी पहली महापौर परिषद बैठक में इसकी घोषणा की। भार्गव को इसी क्षेत्र में बंगला भी आवंटित हुआ है। उन्होंने अपने इलाके का नाम ही बदल लिया, क्योंकि अंग्रेजों ने क्षेत्र का नाम रेसीडेंसी रखा था। क्षेत्र का नाम तो नगर निगम रिकार्ड में बदल जाएगा, लेकिन जिस कोठी में बड़े-बड़े राजनेता रुकते हैं। क्या उसका नाम भी बदलेगा। वह तो अभी भी रेसीडेंसी कोठी ही कहलाती है और अंग्रेजों के जमाने की तोपों से लेकर कई निशानियां वहां आज भी सहेज कर रखी गई हैं। वैसे जो नाम प्रचलित हो जाते हैं, वह कागजों पर तो बदल जाते हैं, लेकिन आम लोग आसानी से नहीं भूल पाते हैं।
कथाओं के भरोसे नेताजी
चुनाव का मौसम आने वाला है। नेता गली-मोहल्ले की खाक तो अब छानते नहीं। कोशिश यह करते हैं कि भीड़ उनके आयोजनों में जुट जाए। कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला विधानसभा क्षेत्र में जगह-जगह बोरिंग खुदवा कर जलसंकट से तो निजात नहीं दिलवा पाए, लेकिन क्षेत्र में धर्म की गंगा जरूर बहा रहे हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर क्षेत्र के लोगों को अयोध्या लेकर जाने के मुद्दे पर वैसे ही इन दिनों चर्चाओं में हैं और अब क्षेत्र में चर्चित कथाकार प्रदीप मिश्रा की कथा कराने की योजना बना ली है। मिश्राजी ने हामी भर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले भी शुक्ला ने क्षेत्र में कथाएं करवाई थीं। नगर निगम चुनाव में मेयर उम्मीदवार के रूप में शुक्ला को एक नंबर विधानसभा क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ा था। अब देखना यह है कि वोटों की खाई कथाओं के जरिए पाटने में शुक्ला का दांव कितना कारगर साबित होता है।
पर्यटन में जम गया श्रौत्रिय का रंग
आइएएस विवेक श्रौत्रिय की इंदौर विकास प्राधिकरण से ऐसे समय विदाई हुई थी, जब वे शहर में नई स्कीमों को लागू कर चुके थे। उन्हें पर्यटन विभाग का जिम्मा दिया गया और अब पर्यटन विभाग में भी श्रौत्रिय का रंग जमने लगा है। भाजपा के पिछले शासनकाल में जब वे उज्जैन के निगमायुक्त थे, तब उनकी पटरी कुछ स्थानीय नेताओं से नहीं बैठी थी। जिसका उन्हें लंबे समय तक नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन अब वे विभाग की मंत्री की गुड लिस्ट में हैं। हाल ही में दिल्ली में पर्यटन पुरस्कार भी उन्होंने लिया। अगले विधानसभा चुनाव से पहले शहर में तबादले का मौसम भी आएगा और यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इंदौर संभाग में श्रौत्रिय को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। वैसे भी शहर में कई अधिकारी चार साल से अधिक समय तक जमे हुए हैं।
थोड़े समय के लिए मिली कुर्सी किस काम की
भाजपा की नई परिषद बने दो माह बीत चुके हैं। इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक बनने के सपने देखने वाले नेताओं को उम्मीद थी कि नगर निगम चुनाव के बाद संचालक मंडल का गठन हो जाएगा। पार्षद के टिकट से दूर रहे कुछ नेताओं को भी संचालक मंडल का लालीपाप वरिष्ठ नेताओं ने दिया था, लेकिन अब सिर्फ दिलासे मिल रहे हैं। निगम चुनाव निपटने के दो माह बाद भी संगठन ने राजनीतिक बोर्ड को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई। अब तो दावेदारों ने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि अगले विधानसभा चुनाव होना है। सालभर के लिए संचालक बनने से क्या मतलब। थोड़े समय के लिए पद मिल गया था। फिर दोबारा संगठन की कृपा नहीं बरसेगी। आइडीए अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं। वे तो संचालकों से तालमेल बैठा लेंगे, लेकिन लगता है कि संगठन भी उन्हें काम के लिए फ्री हैंड देने के मूड में है।