
World Dance Day: आदर्श सिंह, इंदौर (नईदुनिया)। यूं तो इंदौर में आए दिन नवाचार हो रहे हैं। यहां नवाचार अब सिर्फ शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। यहां के कलाकार भी नवाचार करने में नृत्य के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव ला रहे हैं। वैसे बात चाहे गीत संगीत की हो या खानपान की नवाचार होते रहना चाहिए। नवाचारों के जरिए ही किसी भी क्षेत्र में लोगों की रुचि बरकरार रहती है। हां, नवाचार के लिए अनुभव और कला दोनों का ज्ञान होना जरूरी है। कुछ इसी तरह यहां के कलाकार शास्त्रीय नृत्य में नवाचार कर रहे हैं।
कथक, भरतनाट्यम और लोक नृत्य जैसी विधाओं में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के तौर-तरीकों को बदलकर कुछ नया करने का प्रयास कर रहे हैं। हालंकि, यह लोगों को पसंद आ रहा है। कलाकारों का कहना है कि शास्त्रीय नृत्य में नवाचार करने का मकसद लोगों को इसके प्रति आकार्षित करना है। इसे लोग पसंद भी करते हैं और सीखने के इच्छा भी रखते हैं। विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर इंदौर के कलाकारों ने नईदुनिया से बातचीत में बताया कि नवाचार हर क्षेत्र के लिए जरूरी है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इससे मूल कला को नुकसान न हो।

लोक नृत्य जो है वो लोक से आता है, जनसामान्य से आता है। हालांकि, आजकल के लोगों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। लोक नृत्य में समय के साथ काफी परिवर्तन हुए हैं। पहले इसे क्षेत्रीय बोली के गीतों पर किया जाता था, जैसे इंदौर में मालवी गीतों पर इसकी प्रस्तुति होती थी, लेकिन अब इसे फिल्मी गीतों पर भी किया जा रहा है। इस तरह के नवाचार होते रहना चाहिए इससे लोक नृत्य को बढ़ावा मिलेगा। मैं कई वर्षों से बच्चों को लोक नृत्य के साथ उसमें प्रयोग करना भी सिखा रही हूं। - पल्लवी बेंद्रे, लोकनृत्य

नवाचार का मकसद अगर कला को बढ़ाना है तो यह सही है। वैसे भरतनाट्यम में भविष्य के बजाय प्राचीन की तरफ बढ़ रहा है। दरअसल, भरतनाट्यम को सबसे पुराना शास्त्रीय नृत्य कहा जाता है। वहीं, आज जो इसका रूप चल रहा है, वो 18वीं शताब्दी में रुकमणी देवी अरुंडेल तांजोर के म्यूजिशियन ने दिया था। इसमें बदलाव पुराने समय के हिसाब से हो रहे हैं। हालांकि, इसमें भी कई तरह के नवाचार हो रहे हैं, जैसे नाट्य शास्त्र की पारंपरिक ताल को भरतनाट्यम में उठाया जा रहा है। इसके अलावा फ्यूजन और जैज म्यूजिक के ऊपर भी भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी जा रही है। इसके अलावा आजकल इसकी प्रस्तुति के जरिए समाज की विसंगतियों को और राजनीतिक गतिविधियों को दर्शाया जा रहा है। जोकि काफी अलग और अनूठा प्रयोग है। - आशीष पिल्लाई, भरतनाट्यम

मैं शास्त्रीय नृत्य, कथक, बालीवुड, वेस्टर्न, हिप-हाप और जैज सभी तरह के डांस करती हूं। मुझे प्रयोग करना काफी अच्छा लगता है। इसलिए मैंने सभी तरह के नृत्य को एक-दूसरे में मिलाकर करना शुरू कर दिया जैसे बालीवुड गानों पर कथक फ्यूजन की प्रस्तुति। इसे लोगों ने खूब सराहा। अब मैं हिप-हाप और जैज में कथक का प्रयोग करती हूं। इसके लिए कथक में थोड़ा बदलाव करके इसे शामिल करती हूं। दरअसल, कथक को बालीवुड गानों पर कोई नहीं करता। मैं इसमें सकारात्मक प्रयोग करती हूं। इसके पीछे का कारण लोगों को शास्त्रीय नृत्य की ओर आकार्षित करना है। क्योंकि शास्त्रीय नृत्य की तरफ युवाओं का रुझान कम रहता है। इसमें नवाचार करके उन्हें इस ओर लाया जा सकता है। - तान्या ठाकुर, नृत्य
नृतक जीन जार्ज नावेरे के जन्मदिन के अवसर पर विश्व नृत्य दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। यह यूनेस्को के इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट की अंतरराष्ट्रीय डांस कमेटी ने 29 अप्रैल 1982 में इसकी शुरुआत की थी। तभी से यह दिन हर साल विश्व नृत्य दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया के सभी डांस करने वाले व इसमें रुचि रखने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना है। साथ ही लोगों में नृत्य के प्रति जागरूकता फैलाना, ताकि इस क्षेत्र को भी बढ़ावा मिले।