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युवक को 43 घंटे से ज्यादा समय तक अवैध हिरासत में रखा, इंदौर हाई कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

युवक को 43 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखने के मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि भविष्य में दोबारा ऐसी घटना ...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 08:04:49 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 08:04:49 AM (IST)
युवक को 43 घंटे से ज्यादा समय तक अवैध हिरासत में रखा, इंदौर हाई कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार
हाई कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार। -एआई इमेज

HighLights

  1. कहा- पुलिस कमिश्नर मामले की एसीपी स्तर के अधिकारी से जांच कराएं
  2. भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो इसका भी ध्यान रखें
  3. युवक को मुचलका भरवाकर तुरंत छोड़ने के आदेश भी दिए

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : युवक को 43 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखने के मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि मामले की जांच एसीपी या उससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारी से करवाएं। भविष्य में दोबारा ऐसी घटना न हो इसकी व्यवस्था भी करें। कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजे गए युवक को मुचलका भरवाकर तुरंत छोड़ने के आदेश भी दिए।

एडवोकेट केपी गणगौरे ने बताया कि कस्तुराबाई जाटवा ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कहा था कि उनका बेटा अभय उर्फ बालकदास जो कि वर्तमान में इंदौर में रह रहा है, 9 अक्टूबर को अंबिका नगर में रहने वाली अपनी मित्र पूजा से मिलने के लिए शाम 5 बजे के लगभग गया था।


रास्ते में हो गया था विवाद

रास्ते में जयदीप दुबे नामक व्यक्ति ने गाडी़ खडी की थी, जिससे रास्ता रुक रहा था। गाड़ी हटाने की बात को लेकर अभय का दुबे से विवाद हो गया। बाद में दोनों पक्ष थाने पहुंचे। पुलिस ने अभय उर्फ बालकदास को थाने में बैठा लिया। रात में अभय के भाई को भी थाने में बैठा लिया गया था।

24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना था

नियमानुसार उन्हें 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। 11 अक्टूबर को बालकदास के विरुद्ध एक अन्य घटना में प्रकरण दर्ज कर लिया गया। इसमें कहा कि 11 अक्टूबर को वो दोपहर 1.30 बजे के लगभग एयरपोर्ट रोड स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के बाहर लोगों को रोक कर उनके साथ गाली-गलौच कर रहा था।

इस मामले में उसे एसीपी के सामने पेश किया गया था, लेकिन एससीपी ने उसके पिता की ओर से प्रस्तुत जमानत को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि वे सांवेर निवासी हैं और उसे समय-समय पर उपस्थित नहीं करवा सकेंगे। उससे 25-25 हजार रुपये की दो स्थानीय लोगों की जमानत पेश करने के लिए कहा और नहीं देने पर उसे जेल भेज दिया था।

कोर्ट में प्रस्तुत याचिका में मांग की गई थी कि बालकदास को बगैर जमानत छोड़ा जाए। शुक्रवार को पुलिस अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 9 अक्टूबर को हुए विवाद में सावधानी के तौर पर बालकदास को थाने में बैठाया गया था। कोर्ट ने याचिका स्वीकारते हुए एसीपी को निर्देश दिया कि तुरंत निजी मुचलका स्वीकार कर अभय उर्फ बालकदास को रिहा करें।

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