जीरो वेस्ट आयोजन : क्रिकेट के महारथियों के बाद इंदौर के होलकर स्टेडियम में स्वच्छता के खिलाड़ियों ने भी किया कमाल
इंदौर बीते आठ साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर क्यों है, इसकी झलक रविवार रात होलकर स्टेडियम में दिखी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाब...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 12:07:21 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 12:07:21 PM (IST)
होलकर स्टेडियम में मैच के बाद सफाई करते कर्मचारी। -नईदुनियाHighLights
- मैच खत्म होते ही परिसर हुआ चकाचक
- 2700 किलो से अधिक कचरे का होगा पुन: उपयोग
- मैच देखने करीब 30 हजार दर्शक पहुंचे
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर बीते आठ साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर क्यों है, इसकी झलक रविवार रात होलकर स्टेडियम में दिखी। भारत और वेस्टइंडीज के बीच अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबला खेला गया। मैच देखने करीब 30 हजार दर्शक पहुंचे। जाहिर है, इस दौरान हजारों किलो कचरा भी निकला। मगर मैच समाप्त होने के बाद क्रिकेटर और इंदौरी प्रशंसक अपने घर भी नहीं पहुंचे होंगे, इससे पहले ही स्टेडियम चकाचक हो चुका था।
होलकर स्टेडियम में संपन्न इस अंतरराष्ट्रीय मैच को मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) ने जीरो वेस्ट थीम पर आयोजित किया। एमपीसीए के साथ मिलकर स्टेडियम की स्वच्छता के लिए काम करने वाले सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप ने बताया कि खिलाड़ी मैदान पर मैच खेल रहे थे, वहीं स्टेडियम परिसर में स्वच्छता के खिलाड़ी भी लगातार सफाई में जुटे थे। दोनों पारियों के बीच दर्शक स्नैक्स और भोजन करते हैं। इससे निकलने वाले कचरे को तत्काल साफ किया जा रहा था। मैच समाप्त होने के बाद गैलरियों की भी सफाई की गई।
स्टेडियम परिसर से 300 किलो से ज्यादा गीला कचरा निकला
इस बार फोर-वे सेग्रीगेशन के तहत कचरे को चार हिस्सों में अलग किया गया। जगताप ने बताया कि स्टेडियम परिसर से 300 किलो से ज्यादा गीला कचरा निकला है। इससे खाद बनाई जाएगी। खाद बनाने की प्रक्रिया का एक चरण स्टेडियम परिसर में ही पूरा किया जाता है। इसके तहत कचरे में बायोकल्चर मिलाकर रखा जाता है।
इसके अलावा करीब 2400 किलो सूखा कचरा भी निकला है।
इस कचरे का भी पुनर्चक्रण किया जाएगा
इसमें खाद्य सामग्री के गत्ते, पानी के गिलास और प्लास्टिक की बोतलें आदि शामिल हैं। इस कचरे का भी पुनर्चक्रण किया जाएगा। कागज के गत्तों और पानी के गिलासों से लुगदी बनाकर कागज तैयार किया जाता है। पानी की बोतलों से प्लास्टिक के दाने बनाए जाते हैं, जिनका दोबारा इस्तेमाल होता है। शीतल पेय की केन का भी पुनर्चक्रण किया जाता है।
फ्लेक्स से बनेंगी एक हजार थैलियां
स्टेडियम परिसर में विज्ञापन के लिए लगाए गए फ्लेक्स निकालकर उनसे थैलियां बनाई जाएंगी। महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इनसे करीब एक हजार थैलियां तैयार करेंगी। इससे उन्हें रोजगार भी मिलता है। समाजसेवी संस्थाएं इसके लिए प्रति थैली भुगतान करती हैं।