
नईदुनिया प्रतिनिधि, इटारसी। नगरपालिका की बदहाल सफाई व्यवस्था से परेशान होकर वार्ड 16 के कांग्रेस पार्षद अमित कापरे ने खुद झाड़ू उठाकर सफाई की। उन्होंने अपने वार्ड की अजय बचन कॉलोनी में झाड़ू लगाकर नगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पार्षद का आरोप है कि शहर के बाजार क्षेत्रों को छोड़कर आंतरिक गलियों और कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसकी प्रमुख वजह सफाई कर्मचारियों की कमी और संसाधनों का अभाव है। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार की आबादी वाले शहर के बड़े वार्डों में शामिल वार्ड 16 में पर्याप्त सफाई कर्मचारी नहीं होने से नियमित सफाई कराना चुनौती बन गया है।
कापरे ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक नगरपालिका के 60 से अधिक सफाई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सितंबर 2022 तक नगरपालिका में कुल 109 सफाई कर्मचारी कार्यरत थे। इसके बाद शहर में नई कॉलोनियां विकसित होने से नगरपालिका क्षेत्र का विस्तार भी हुआ है।
वर्तमान में स्थायी कर्मचारियों के अलावा करीब 100 आउटसोर्स सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। पार्षद के अनुसार, शहर में बुनियादी सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए 300 से अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है।
कर्मचारियों की कमी के बीच त्योहार के समय मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा सफाई मुकद्दमों को पार्षदों से सलाह लिए बिना एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। कापरे ने सीएमओ सुरेखा जाटव से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में नए प्रयोग करने के बजाय उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और व्यवस्थाओं में सुधार प्राथमिकता होना चाहिए।
पार्षद ने नगरपालिका की आर्थिक स्थिति और दैनिक जरूरतों के लिए सामग्री की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारियों को कई बार चार-चार महीने तक झाड़ू नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में पार्षदों को अपने पास से पैसे देकर सफाई कर्मचारियों के लिए झाड़ू खरीदनी पड़ती है।
कचरा परिवहन में इस्तेमाल होने वाले छोटे हाथ ठेलों की मरम्मत में भी छह-छह महीने तक लग जाते हैं। जब दैनिक सफाई के लिए जरूरी सामग्री ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी, तो वार्डों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल होगा। जनता ने पार्षदों को भरोसे के साथ चुना है, लेकिन नगरपालिका के पास संसाधनों की कमी के कारण उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
नगरपालिका की जलप्रदाय शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कापरे ने बताया कि जल आपूर्ति संबंधी कार्यों के लिए दो इंच का पाइप मांगने पर उसे उपलब्ध कराने में करीब चार महीने लग जाते हैं। इसके बाद पाइप जोड़ने के लिए सॉकेट, फ्लैंज और वाल्व जैसी सामग्री उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर काम लंबित कर दिया जाता है।
पिछले दो महीने में पाइपलाइन लीकेज सुधारने के लिए उन्हें तीन बार अपनी जेब से करीब 4500 रुपये खर्च करने पड़े। नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगरपालिका की है, लेकिन जरूरी सामग्री समय पर नहीं मिलने से पार्षदों को निजी स्तर पर खर्च करना पड़ रहा है।
पार्षद ने नगरपालिका के विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उनके अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में खींचतान के कारण पिछले एक साल से शहर में स्ट्रीट लाइट के खंभों पर नई एलईडी लाइटें लगाने का काम प्रभावित है। उनका आरोप है कि वर्तमान ठेकेदार पुरानी एलईडी के बदले नई लाइटें उपलब्ध नहीं करा रहा है। ऐसे में कई स्थानों पर पुरानी ट्यूबलाइट के सहारे काम चलाना पड़ रहा है।
शहर में सफाई, जलप्रदाय और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों ने नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने की अपेक्षा है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की कमी और आवश्यक संसाधनों की अनुपलब्धता से व्यवस्थाएं प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ऐसे में नगरपालिका अध्यक्ष पंकज चौरे और मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुरेखा जाटव के सामने शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चुनौती है। वार्डों में नियमित सफाई, जलप्रदाय संबंधी शिकायतों का समय पर निराकरण और खराब स्ट्रीट लाइटों को बदलने जैसी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है, ताकि नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।