इटारसी नवदुनिया प्रतिनिधि।

भारतीय रेल में इंटरमीडिएट ब्लाक सिग्नलिंग व्यवस्था आइबीएस सिस्टम से डबल लाइन सेक्शन पर रेलखंड क्षमता बढ़ाने के लिए की जाती है। आइबीएस के जरिए एक लंबे रेलखंड को दो खंडों में विभाजित कर ज्यादा रेल गाड़ियां चलाई जा सकती हैं। 10 मार्च तक जोन में 7 नए सिग्नल विकसित किए गए हैं, इनमें जबलपुर मंडल के देवरी-गोसलपुर, भिटौनी-भेड़ाघाट, विक्रमपुर-भिटौनी एवं श्रीधाम-विक्रमपुर रेलखंड में 04 एवं भोपाल मंडल के खिरकिया- भिरंगी, सुरगांव बंजारी-चारखेड़ा खुर्द एवं छनेरा-बरूड़ रेलखंडों में कुल 03 सिग्नल ब्लॉक लगाए गए हैं। साल 2020-21 के दौरान अब तक पश्चिम मध्य रेल में कुल 07 नये सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे इन सेक्शन में ट्रेनों की रफ्तार एवं क्षमता बढ़ोतरी भी होगी। आइबीएस सिस्टम में ब्लॉक इंस्ट्रूमेंटस की जरूरत नहीं पड़ती, साथ ही स्टेशन मास्टर और ऑपरेटिंग स्टाफ की आवश्यकता होती है, जिससे उपकरणों, स्टेशन बिल्डिंग और ऑपरेटिंग स्टाफ पर होने वाले खर्च की बचत होती है। मुख्य जनंसपर्क अधिकारी के अनुसार आइबीएस पूरी तरह इलेक्ट्रानिक सिस्टम पर आधारित है, यह प्रणाली रेलगाड़ियों की निकटता को कम से कम करती है और ट्रेन की गति को बढ़ाती है, जिससे समय की बचत होती है।

यूजर डिपो मॉड्यूल प्रोजेक्ट में अव्व्ल रहा जबलपुर जोन

भारतीय रेलवे में यूजर डिपो मॉड्यूल प्रणाली में सौ फीसद काम करने पर पश्चिम मध्य रेलवे अव्वल रहा है। जोन के भंडार विभाग के अंतर्गत स्टॉक आइटम का लेन-देन सिर्फ आइएमएमएस पर ऑनलाइन किया जाता था। अन्य विभगाों में स्टोर्स का ऑनलाइन पता लगाने की व्यवस्था नहीं थी। अब सेंटर फॉर रेलवे इन्फारमेशन सेंटर क्रिस द्वारा सभी विभागों में उपकरणों, संयंत्र एवं अन्य वस्तुओं के ऑनलाइन लेनदेन हेतु यूजर डिपो मॉड्यूल विकसित किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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