
डिजिटल डेस्क, इटारसी। मध्य एवं दक्षिण भारत के रेल मार्ग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए नागपुर-इटारसी के बीच 308 किलोमीटर लंबी चौथी रेलवे लाइन का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। 5,451 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत वर्तमान में सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण और विभिन्न पुलों व सुरंगों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। भारतीय रेलवे का लक्ष्य इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का है।
इस नई रेल लाइन के शुरू होने से बीना से नागपुर तक कुल 544 किलोमीटर के रेलखंड पर यातायात क्षमता में भारी इजाफा होगा। इससे इटारसी से नागपुर के बीच यात्रा का समय घटकर 4 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों के करीब 1 घंटे के समय की बचत होगी। इसके अलावा, माल ढुलाई की लागत में भी प्रति क्विंटल लगभग 150 रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।
धाराखोह से मरामझिरी घाट के दुर्गम पहाड़ी व जंगल वाले क्षेत्रों को काटकर 4 आधुनिक डबल-ट्रैक सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। 14 मीटर चौड़ी और 10 मीटर ऊंची ये सुरंगें बिना ब्लास्टिंग के पहाड़ी कटिंग तकनीक से तैयार की जा रही हैं।
इनमें सीमेंटेड ट्रैक और आपातकालीन स्थितियों के लिए इमरजेंसी बॉक्स की व्यवस्था रहेगी। बता दें कि पहली सुरंग 575 मीटर, दूसरी सुरंग 221 मीटर, तीसरी सुरंग 239 मीटर तथा चौथी सुरंग 584 मीटर है। इस रेलखंड पर 415 छोटे पुल, 36 बड़े पुल, 74 अंडरब्रिज और 2 ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।
रोजाना 140 से ज्यादा ट्रेनों की आवाजाही वाले इटारसी जंक्शन पर वर्तमान में केवल 7 प्लेटफॉर्म हैं, जिससे ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। 3 नए प्लेटफॉर्म (कुल 10) बनने से ट्रेनों की वेटिंग खत्म होगी।
चौथी लाइन चालू होने से गाड़ियों को आउटर या लूप लाइन पर रोकने की समस्या खत्म होगी। सिग्नलिंग के समय में कमी आने से बिजली की खपत घटेगी और रेलवे कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त दबाव भी कम होगा। (अशोक कटारे, सेवानिवृत्त मुख्य यातायात निरीक्षक, रेलवे)