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112 साल पुराने नक्शों को मिलेगा नया जीवन, जानिए क्‍या है जबलपुर नगर निगम का प्‍लान

वर्षों से संभालकर रखे गए इन रिकाॅर्ड को नष्ट होने से बचाने के लिए निगम ने संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में पुराने दस्तावेजों की सफाई क...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 01 Sep 2026 07:08:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 01 Sep 2026 07:08:00 PM (IST)
112 साल पुराने नक्शों को मिलेगा नया जीवन, जानिए क्‍या है जबलपुर नगर निगम का प्‍लान
नगर निगम में एयरटाइट पैकिंग में रिकाॅर्ड को बाॅक्स में कोडिंग कर रखा जा रहा सुरक्षित। नईदुनिया

HighLights

  1. अब निगम का रिकाॅर्ड होगा डिजिटल
  2. सफाई कर एयरटाइट पैकिंग की तैयारी
  3. दीवारों में सीलन व दरारें भी आ गई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नगर निगम के रिकाॅर्ड रूम में धूल और नमी से खराब हो रहे करीब 112 साल पुराने दस्तावेजों को अब नया जीवन दिया जा रहा है। खराब हो रहे इन दस्तावेजों में शहर के विस्तार, मकानों-दुकानों के नक्शों से लेकर नामांतरण, कर निर्धारण और जन्म-मृत्यु तक की महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है।

शहर का पुराना इतिहास डिजिटल भी सुरक्षित

प्रत्येक खंड को कोड और मार्किंग दी जा रही है, जिससे जरूरत के समय रिकाॅर्ड की तलाश में घंटों मशक्कत न करनी पड़े। इसके बाद इनका डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। यानी कागज पर दर्ज शहर का पुराना इतिहास डिजिटल रिकाॅर्ड में भी सुरक्षित रहेगा।


इसलिए संरक्षित करने की की जा रही कवायद

दरअसल नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल रिकाॅर्ड रूम 50 साल पुराने भवन में संचालित हो रहा है। रिकाॅर्ड रूम की छत जगह-जगह से क्षत-विक्षत हो गई है। बारिश होने पर पानी टपकता है। दीवारों में सीलन व दरारें भी आ गई है, जिससे रिकाॅर्ड के खराब होने की संभावना बढ़ गई थी।

इन दस्तावेजों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां

इन दस्तावेजों में शहर के पुराने स्वरूप से लेकर मकान-दुकानों के नक्शे, नामांतरण, कर निर्धारण सहित जन्म-मृत्यु से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। लिहाजा रिकार्ड के संरक्षण के लिए निगम ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।

चरणबद्ध होगा कार्य

  • पहले चरण में पुराने दस्तावेजों की सफाई की जा रही है। इसके बाद इन्हें अलग-अलग खंडों में व्यवस्थित कर एयरटाइट तरीके से सुरक्षित रखा जाएगा।
  • प्रत्येक दस्तावेज और खंड को अलग कोड और मार्किंग दी जाएगी। किसी रिकाॅर्ड की जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को फाइलों के ढेर में घंटों तलाश नहीं करनी पड़ेगी और संबंधित दस्तावेज आसानी से खोजा जा सकेगा।
  • निगम की योजना के अनुसार दस्तावेजों की प्राथमिक सुरक्षा और व्यवस्थित वर्गीकरण के बाद इनके डिजिटलाइजेशन का काम किया जाएगा। पुराने कागजी रिकाॅर्ड को स्कैन कर डिजिटल रिकाॅर्ड तैयार किया जाएगा।
  • मूल दस्तावेजों को बार-बार निकालने की जरूरत कम होगी और उनके खराब होने का खतरा भी घटेगा। साथ ही शहर के पुराने प्रशासनिक और संपत्ति संबंधी रिकाॅर्ड को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।

नागरिकों को भी मिल सकेगी जानकारी

इन दस्तावेजों का महत्व केवल निगम के कामकाज तक सीमित नहीं है। पुराने मकानों, दुकानों, संपत्तियों और नामांतरण से जुड़े मामलों में नागरिकों को भी इन रिकाॅर्ड की जरूरत पड़ सकती है। संरक्षण और डिजिटलाइजेशन के बाद जरूरत पड़ने पर नागरिक संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, निर्धारित प्रक्रिया के तहत महज 50 रुपये शुल्क देकर दस्तावेज की छायाप्रति भी प्राप्त की जा सकेगी।

दशकों पुराने दस्तावेज

  • 75 हजार नक्शा है रिकार्ड रूम में
  • 12 हजार से ज्यादा कर निर्धारित और जन्म-मृत्यु के दस्तावेज
  • 20 हजार से ज्यादा नामांतरण व अन्य दस्तावेज है

नागरिकों के मूल रिकाॅर्ड को संरक्षित किया जा रहा है। दस्तावेजों को अभी सुरक्षित रखा जा रहा है बाद में इनका डिजिटलाइलेशन किया जाएगा। ये प्रक्रिया भविष्य में दस्तावेजों की खोज और सत्यापन की प्रक्रिया को भी आसान बनाएगी।।

दिलीप दुबे, प्रभारी अधिकारी राजस्व रिकाॅर्ड व अधीक्षक नगर निगम

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