
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नगर निगम के रिकाॅर्ड रूम में धूल और नमी से खराब हो रहे करीब 112 साल पुराने दस्तावेजों को अब नया जीवन दिया जा रहा है। खराब हो रहे इन दस्तावेजों में शहर के विस्तार, मकानों-दुकानों के नक्शों से लेकर नामांतरण, कर निर्धारण और जन्म-मृत्यु तक की महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है।
प्रत्येक खंड को कोड और मार्किंग दी जा रही है, जिससे जरूरत के समय रिकाॅर्ड की तलाश में घंटों मशक्कत न करनी पड़े। इसके बाद इनका डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। यानी कागज पर दर्ज शहर का पुराना इतिहास डिजिटल रिकाॅर्ड में भी सुरक्षित रहेगा।
दरअसल नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शामिल रिकाॅर्ड रूम 50 साल पुराने भवन में संचालित हो रहा है। रिकाॅर्ड रूम की छत जगह-जगह से क्षत-विक्षत हो गई है। बारिश होने पर पानी टपकता है। दीवारों में सीलन व दरारें भी आ गई है, जिससे रिकाॅर्ड के खराब होने की संभावना बढ़ गई थी।
इन दस्तावेजों में शहर के पुराने स्वरूप से लेकर मकान-दुकानों के नक्शे, नामांतरण, कर निर्धारण सहित जन्म-मृत्यु से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। लिहाजा रिकार्ड के संरक्षण के लिए निगम ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इन दस्तावेजों का महत्व केवल निगम के कामकाज तक सीमित नहीं है। पुराने मकानों, दुकानों, संपत्तियों और नामांतरण से जुड़े मामलों में नागरिकों को भी इन रिकाॅर्ड की जरूरत पड़ सकती है। संरक्षण और डिजिटलाइजेशन के बाद जरूरत पड़ने पर नागरिक संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, निर्धारित प्रक्रिया के तहत महज 50 रुपये शुल्क देकर दस्तावेज की छायाप्रति भी प्राप्त की जा सकेगी।
नागरिकों के मूल रिकाॅर्ड को संरक्षित किया जा रहा है। दस्तावेजों को अभी सुरक्षित रखा जा रहा है बाद में इनका डिजिटलाइलेशन किया जाएगा। ये प्रक्रिया भविष्य में दस्तावेजों की खोज और सत्यापन की प्रक्रिया को भी आसान बनाएगी।।
दिलीप दुबे, प्रभारी अधिकारी राजस्व रिकाॅर्ड व अधीक्षक नगर निगम