सुरेन्द्र दुबे, जबलपुर (Ganesh Chaturthi 2024) । सिद्धिदात्री नर्मदा के तट पर स्थित बाहशाह हलवाई मंदिर अपनी अन्य विशेषताओं के साथ 16 भुजी श्रीगणेश विग्रह के लिए सर्वाधिक चर्चित है। गौरीघाट मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते ही एक के बाद एक देवी-देवताओं के विग्रह दिखने लगते हैं। इसके बाद मूल परकोटे में पंचानन महादेव विराजमान हैं। उनके दाएं भाग में स्थित मंदिर में श्रीगणेश का यह प्राच्य विग्रह बरबस ही ध्यान आकर्षित कर लेता है। जो एक बार इस विग्रह का दर्शन कर लेता है, वह बार-बार दर्शन करने आने लगता है।
दो दशक से निरंतर दर्शन करने पहुुंच रहे आयुर्वेदाचार्य विनोद सराफ बताते हैं हक इस श्रीगणेश मंदिर को इच्छापूर्ति श्रीगणेश मंदिर के नाम से पुकारते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पूर्ण मनोयोग से पूजन-अर्चन करने पर मनोवांछित कामना की पूर्ति अवश्य होती है।
समीर खम्परिया बताते हैं कि जब पहली बार इस मंदिर में पहुंचा तो देखा कि श्रीगणेश के विग्रह के सामने की ओर छत पर श्रीयंत्र अंकित है। साथ ही चारों युगों के भगवान की मूर्तियां ने भी आकर्षित किया था। मैंने देखा कि संगमरमर के स्तम्भ में 27 नक्षत्रों, नवग्रहों और दिशाओं की मूर्तियां भी बनी हुई हैं।
अमित चौधरी ने बताया कि इस मंदिर के समीप एक गुफा भी स्थित है। इसका दरवाजा खुला हुआ है। पुराने लोग बताते हैं कि रानी दुर्गावती मदनमहल किले से गुफा के रास्ते इस मंदिर में पूजा करने के लिए आती थीं। राजाघाट यानि लालपुर में गुफा का एक द्वार खुलता था, जहां रानी दुर्गावती नर्मदा स्नान करने के बाद राजकाज प्रारंभ करती थीं।