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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP High Court : किसी संस्थान या विश्वविद्यालय की गलती का खामियाजा विद्यार्थी नहीं भुगत सकता

MP High Court :हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, याचिकाकर्ता छात्रा को प्रथम समेस्टर के औसत अंक देने और अंतिम सेमेस्टर में शामिल करने के निर्देश।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 07 May 2024 10:48:43 AM (IST)Updated Date: Tue, 07 May 2024 10:48:43 AM (IST)
MP High Court : किसी संस्थान या विश्वविद्यालय की गलती का खामियाजा विद्यार्थी नहीं भुगत सकता

HighLights

  1. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को दिए निर्देश।
  2. पहले समेस्टर के औसत अंक दे अंतिम सेमेस्टर में शामिल करें।
  3. 2021 में उत्तर पुस्तिकाएं घर से लिख कर कालेज में जमा की गई थीं।

MP High Court :नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि किसी संस्थान या विश्वविद्यालय की गलती का खामियाजा विद्यार्थी नहीं भुगत सकता। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने उक्त टिप्पणी के साथ छात्रा इशिता पटेल को पहले समेस्टर के औसत अंक देने और अंतिम सेमेस्टर में शामिल करने के निर्देश राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को दिए।

पहले समेस्टर के औसत अंक दे अंतिम सेमेस्टर में शामिल करें

दरअसल, विश्वविद्यालय या ग्लोबल इंजीनियर कालेज ने याचिकाकर्ता छात्रा की पहली सेमेस्टर के एक विषय की उत्तर पुस्तिका गुमा दी थी। जबलपुर निवासी इशिता पटेल की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि वर्ष 2021 में उत्तर पुस्तिकाएं घर से लिख कर कालेज में जमा की गई थीं।


कापी नहीं मिली, जबकि उसकी रसीद भी पेश की गई

विश्वविद्यालय ने यह कहकर एक विषय में नंबर नहीं दिए कि उन्हें उसकी कापी नहीं मिली, जबकि उसकी रसीद भी पेश की गई। बाकी सभी विषयों में छात्रा को अच्छे अंक मिले थे। मामले में हाई कोर्ट के कई पूर्व फैसलों का हवाला भी दिया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उक्त विषय में अौसत अंक देकर, अंमित सेमेस्टर में बैठने की अनुमति भी प्रदान कर दी।