जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जबलपुर से मुंबई जाने के लिए शहर से शुरू होने वाली गरीब रथ और एक वीकली स्पेशल, सिर्फ दो ट्रेनें हैं। इसमें गरीब रथ ही एक ऐसी ट्रेन है, जो सप्ताह में तीन दिन चलती है और दूसरी ट्रेन वीकली है, जो सप्ताह में सिर्फ एक दिन यहां से चलती है। नियमित ट्रेन न होने की वजह से पहले से ही यात्री जबलपुर से मुंबई जाने और आने में परेशान होते हैं। शहर के 90 फीसदी यात्री गरीब रथ से ही मुंबई जाते और आते हैं। इस ट्रेन में हर बार लंबी वेटिंग होने से हर यात्री को आरक्षित सीट नहीं मिलती। इन दिनों भी ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों का यही हाल है। पश्चिम मध्य रेलवे के आपरेटिंग विभाग राहत देने पिछले दो बार से इस ट्रेन में एक अतिरिक्त कोच लगा रहा है, लेकिन इससे भी सिर्फ 78 यात्रियों को राहत मिल रही है।

टिकट कंफर्म नहीं तो यात्रा रद

रेलवे नियम के मुताबिक काउंटर या फिर आनलाइन ली गई टिकट रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी कंफर्म नहीं है तो वह स्वत: ही रद हो जाती है। टिकट में यदि एक से अधिक यात्री हैं और एक की भी टिकट कंफर्म है तो शेष यात्रियों कोे ट्रेन में सफर करने के दौरान रियायत दे दी जाती है। हालांकि गरीब रथ में लंबी वेटिंग होने से अधिकांश बार ऐसा नहीं होता। टिकट कंफर्म न होने से वह स्वत: रद हो जाती है। ऐसे में कई बार यात्री को मजबूरी में ट्रेन का सफर करना पड़ता है। कई दफा तो उन्हें ट्रेन से अगले स्टेशन पर उतार दिया जाता है या फिर उनके टिकट चैकिंग स्टाफ भारी जुर्माना वसूलता है। जुर्माना देने के बाद भी यात्री को सीट नहीं मिलती।

कोच की डिजाइन बनी आफत

जबलपुर से मुंबई के बीच लगभग 14 साल से गरीब रथ ट्रेन चल रही है। इस ट्रेन में लगने वाले थर्ड ऐसी के कोच अब रेलवे कोच फैक्ट्री ने बनाना बंद कर दिए हैं। इधर पमरे के पास इन कोच की संख्या सीमित है। कई बार लंबी वेटिंग होने की वजह से पमरे का आपरेटिंग विभाग ट्रेन में एक या दो कोच ही अतिरिक्त कोच बमुश्किल से लगा पता है। जानकार बताते हैं कि इन कोच की जगह, हमसफर ट्रेन के कोच को लेना है, लेकिन अभी तक इस पर रेलवे ने कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस वजह से यात्रियों को हर बार लंबी वेटिंग की वजह से परेशान होना पड़ रहा।

इन पर एक नजर

मिडिल सीट से भी राहत नहीं - रेलवे ने इन कोच की सीमित संख्या होने की वजह से हर कोच में साइड अपर और लोवर के बीच एक मिडिल सीट भी लगाई। यह कोच भी लंबी वेटिंग से राहत नहीं दे पा रहे हैं।

नहीं जोड़ रहे बेडरोल का पैसा-

ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से ज्यादा किराया न लिया जाए, इस लिए रेलवे ने इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से टिकट के साथ बेडरोल का पैसा नहीं लिया। इस व्यवस्था को वैकिल्पक रखा।

वेटिंग-

शनिवार को जाने वाली गरीब रथ में शुक्रवार शाम पांच बजे तक 65 से अधिक वेटिंग थी। वहीं सोमवार को जाने वाली गरीब रथ में 40 से ज्यादा रही। हालांकि यह वेटिंग कई बाद 400 पर कर जाती है।

अतिरिक्त कोच लगा रहे

गरीब रथ में लंबी वेटिंग को देखते हुए हम पिछले दो बार से एक अतिरिक्त कोच लगा रहे हैं। हमारा प्रयास रहता है कि जितनी अधिक वेटिंग टिकट क्लीयर हो जाए, उतना बेहतर है।-विश्वरंजन, सीनियर डीसीएम, जबलपुर रेल मंडल

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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