
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज की प्रस्तावित ई-म्यूजियम परियोजना को जल्द विभागीय मंजूरी मिलने की कवायद जारी है। योजना की लागत लगभग दो करोड़ रुपये प्रस्तावित है। प्रस्तावित योजना संबंधित लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के भोपाल स्थित मुख्यालय के पाले में है।
इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को डिजिटल और इंटरएक्टिव स्वरूप देना है। इससे मेडिकल शिक्षा को किताबों से निकालकर व्यावहारिक और रोचक बनाना है। इस तरह मेडिकल काॅलेज को जल्द ही अपना अत्याधुनिक मेडिकल म्यूजियम मिलने वाला है। यह मेडिकल काॅलेज का एक अनुभव प्रयोग है, इससे छात्रों को समग्र जानकारी मिलने का रास्ता सुगम होगा।
इस डिजिटल म्यूजियम में शरीर रचना से लेकर दुर्लभ बीमारियों तक की जानकारी एक क्लिक पर मिलेगी। इससे एमबीबीएस, पीजी और नर्सिंग के छात्रों को सीधा फायदा होगा। रटने के बजाय छात्रों को शरीर की संरचना और बीमारियों की विजुअल समझ मिलेगी। इससे डायग्नोसिस स्किल सुधरेगी।
क्या होगा ई-म्यूजियम में : अभी तक छात्रों को एनाटामी और पैथोलाजी समझने के लिए फार्मेलिन में रखे अंगों और पुराने माडलों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई सैंपल 20 साल पुराने हो चुके हैं और खराब हो रहे हैं।
ई-म्यूजियम में-3डी वर्चुअल डिसेक्शन टेबल : 3डी टेबल पर शरीर की चीरफाड़ और हर नस-नाड़ी को 360 डिग्री में देखा जा सकेगा।
डिजिटल स्लाइड बैंक: 5000 से अधिक दुर्लभ बीमारियों की बायोप्सी स्लाइड डिजिटल स्क्रीन पर हाई रेजोल्यूशन में दिखेगी।
इतिहास और केस स्टडी: दुर्लभ ऑपरेशन, जुड़वां बच्चों के केस, कैंसर के सैंपल का डिजिटल रिकार्ड रहेगा।
मेडिकल काॅलेज डीन डाॅ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि "यह ई-म्यूजियम पढ़ाई को आसान और रोचक बनाएगा। छात्र रात में भी आनलाइन पोर्टल से म्यूजियम देखकर रिवीजन कर सकेंगे। बार-बार प्रैक्टिकल के लिए सैंपल खराब नहीं होंगे। पीजी छात्रों को रिसर्च और थीसिस लिखने में दुर्लभ डेटा आसानी से मिलेगा। डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा।
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