MP हाई कोर्ट में याचिका के जरिए शासकीय वकीलों की नियुक्ति को चुनौती
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है, लेकिन महाधिवक्त ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Jan 2026 08:20:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Jan 2026 08:26:37 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट।HighLights
- महाधिवक्ता कार्यालय से जुड़ा मामला।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिए मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति काे चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी ने याचिका में आरोप लगाया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में नियम विरुद्ध तरीके से अर्हताविहीन वकीलों को शासकीय वकील बना दिया गया है।
महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 ला आफिसर्स की नियुक्ति को लेकर 25 दिसंबर को सूची जारी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और पक्षपातपूर्ण है। सूची में पारदर्शिता का अभाव है। इस याचिका पर हाई कोर्ट में शीघ्र सुनवाई होगी।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका स्पष्ट उल्लंघन किया। अधिसूचना में कहा गया था कि सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की प्रेक्टिस की योग्यता निर्धारित है। इसके उलट कई शासकीय अधिवक्ता ऐसे हैं जिनकी प्रेक्टस 10 साल से बहुत कम है।
प्रपत्र का क्या किया
अधिवक्ता योगेश सोनी ने दलील दी कि इस बार महाधिवक्ता कार्यालय में ला आफिसर बनने के लिए सैकड़ों वकीलों ने आवेदन किया था। आवेदन निर्धारित फार्म में आमंत्रित तो किए गए, लेकिन यह कहीं भी सार्वजनिक नहीं किया गया कि इन आवेदनों की जांच, मूल्यांकन और शार्टलिस्टिंग किस आधार पर की गई। यह भी कहा गया है कि न तो कोई मापदंड जारी किया गया, न अंक प्रणाली, न ही चयन या अस्वीकृति के कारण बताए गए। इससे पूरी प्रक्रिया पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।