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जबलपुर में साइबर ठगों के बड़े मददगार गिरोह का भंडाफोड़, एटीएम और बैंक खाते बेचने वाला आरोपी गिरफ्तार, 10 एटीएम कार्ड और कैश बरामद

एटीएम कार्ड और बैंकिंग जानकारी बेचने वाले गिरोह के एक सदस्य को बेलबाग पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

By Deepankar RoyEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sun, 28 Jun 2026 06:27:28 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Jun 2026 06:27:28 PM (IST)
जबलपुर में साइबर ठगों के बड़े मददगार गिरोह का भंडाफोड़, एटीएम और बैंक खाते बेचने वाला आरोपी गिरफ्तार, 10 एटीएम कार्ड और कैश बरामद
साइबर ठगी

HighLights

  1. साइबर ठगी के लिए बैंक खाते और एटीएम कार्ड बेचने वाले गिरोह का सदस्य गिरफ्तार
  2. आरोपित के पास से 10 एटीएम कार्ड, 20 हजार रुपये नकद, मोबाइल और मोपेड जब्त
  3. मोबाइल चैट से बैंक खातों, आधार, पैन और पासवर्ड साझा करने के मिले साक्ष्य

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। साइबर ठगी के लिए लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड और बैंकिंग जानकारी बेचने वाले गिरोह के एक सदस्य को बेलबाग पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित के कब्जे से विभिन्न बैंकों के 10 एटीएम कार्ड, 20 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन और बिना नंबर की मोपेड जब्त की गई है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान आधारताल के न्यू कंचनपुर निवासी सौरभ कुमार रजक (31) के रूप में हुई है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

वाहन जांच के दौरान हुआ गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार शनिवार रात बेलबाग तिराहे पर वाहन जांच के दौरान बिना नंबर की मोपेड पर सवार एक युवक संदिग्ध अवस्था में मिला। पूछताछ में वह घबराया हुआ दिखाई दिया। तलाशी लेने पर उसके पास से एसबीआई, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया सहित विभिन्न बैंकों के 10 एटीएम कार्ड तथा 20 हजार रुपये नकद बरामद हुए।


संदिग्ध रकम जमा करने जा रहा था

पूछताछ में सौरभ ने बताया कि उसका संपर्क रामपुर की मांडवा बस्ती निवासी रोहित से हुआ था। रोहित अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर उसे प्रतिदिन पांच से दस एटीएम कार्ड उपलब्ध कराता था। उसके निर्देश पर वह कैश डिपॉजिट मशीनों के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में नकदी जमा करता था। बरामद 20 हजार रुपये भी जमा कराने के लिए ही उसे दिए गए थे।

मोबाइल चैट में मिले अहम सुराग

साइबर सेल की जांच में आरोपित के मोबाइल की इंटरनेट मीडिया चैट खंगालने पर "नितिन 3333" नाम का संपर्क मिला। चैट में बड़ी संख्या में बारकोड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खातों की जानकारी, लॉगिन आईडी, पासवर्ड और पासबुक से जुड़े दस्तावेज साझा किए जाने के प्रमाण मिले।

गिरोह तक पहुंचाता था बैंक खातों की जानकारी

पूछताछ में सौरभ ने स्वीकार किया कि उसने स्वयं भी बैंक ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इक्यूटास बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में खाते खुलवाए थे। जांच में यह भी सामने आया कि उसने दीपक सोनी और ओंकार चौधरी के बैंक खातों की जानकारी भी इंटरनेट मीडिया के माध्यम से गिरोह तक पहुंचाई थी।

उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में दर्ज हैं मामले

पुलिस के अनुसार जिन बैंक खातों का विवरण गिरोह के साथ साझा किया गया, उनसे जुड़े साइबर ठगी के मामले गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पहले से दर्ज हैं। पकड़े गए आरोपित सौरभ के बैंक खाते से संबंधित शिकायत भी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर क्षेत्र में दर्ज पाई गई है।

तीन पर केस दर्ज, जांच जारी

पुलिस जांच में सामने आया कि सौरभ रजक, रोहित और "नितिन 3333" नाम से संचालित इंटरनेट मीडिया अकाउंट धारक ने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उनके एटीएम कार्ड और बैंकिंग विवरण हासिल किए तथा उन्हें बेचकर अवैध लाभ कमाया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है। सौरभ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार आरोपितों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

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