
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बिजली के अगले पांच साल के टैरिफ का असर प्रदेश के करीब एक करोड़ 83 लाख उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना है। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2027-28 से 2031-32 के लिए प्रस्तावित टैरिफ पर आपत्ति और सुझाव देने के लिए मंगलवार तक समय दिया था।
अब आठ सितंबर को जनसुनवाई होगी। इसके बाद आयोग प्रस्ताव पर निर्णय लेगा, लेकिन इतने बड़े मुद्दे पर आपत्ति और सुझाव देने के लिए जबलपुर से गिने-चुने लोग ही आगे आए हैं।
बता दें कि टैरिफ प्रस्ताव में बिजली की दरों के साथ वितरण कंपनियों की हानि, परिचालन खर्च, पूंजी पर प्रतिलाभ और न्यूनतम शुल्क जैसे कई ऐसे प्रविधान शामिल हैं, जिनका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। आयोग के समक्ष दायर आपत्तियों में प्रस्तावित वितरण हानि के लक्ष्य को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
देर शाम तक यह साफ नहीं हो सका था कि प्रदेश भर से कितनी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। जबलपुर के आपत्तिकर्ता सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल और महाकोशल उद्योग संघ के कार्यकारी अध्यक्ष डीआर जैसवानी ने तर्क दिया है कि वितरण हानि का मानक तय करते समय उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रस्तावित बदलाव के कारण अगले वित्त वर्ष में रिटेल टैरिफ में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका भी जताई गई है। आपत्ति में केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना का भी उल्लेख है, जिसमें वितरण हानि को 12 से 15 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक रखा गया था। वहीं प्रस्तावित व्यवस्था में इसे पूरी तरह हासिल करने की अवधि वर्ष 2030-31 तक बताई गई है।
टैरिफ प्रस्ताव को लेकर शहर के औद्योगिक संगठनों की नजर अब मिनिमम चार्ज पर है। संचालकों का कहना है कि उत्पादन बंद होने या मशीनें नहीं चलने के बावजूद स्थायी और न्यूनतम शुल्क के कारण बिजली बिल का बोझ बना रहता है।
औद्योगिक संगठन जनसुनवाई में मिनिमम चार्ज को खत्म करने अथवा इसमें व्यावहारिक बदलाव की मांग उठा सकते हैं। उद्योगों का तर्क है कि जिन इकाइयों में उत्पादन नहीं हो रहा, उनसे बिजली की खपत के अनुरूप भुगतान व्यवस्था अधिक व्यावहारिक होगी।
मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.83 करोड़ है। इनमें अकेले घरेलू उपभोक्ता 1.29 करोड़ से अधिक हैं, लेकिन बिजली दरों के वार्षिक टैरिफ प्रस्ताव पर आम उपभोक्ताओं की भागीदारी बेहद सीमित है। तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे प्रदेश से आयोग को 207 आपत्ति और सुझाव ही मिले। वर्ष 2024-25 में 69, 2025-26 में 84 और 2026-27 में 54 आपत्ति-सुझाव दर्ज हुए।
अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार महाराष्ट्र में टैरिफ पिटिशन को लेकर उपभोक्ताओं में अपेक्षाकृत अधिक जागरूकता है। वहां लोग बिजली दरों के प्रस्ताव का अध्ययन कर आयोग के समक्ष आपत्ति और सुझाव दर्ज कराते हैं। उत्तर प्रदेश में भी टैरिफ प्रस्तावों पर बड़ी संख्या में आपत्तियां लगाई जाती हैं।