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बदलेगी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुलपति नियुक्ति की शर्त, हाई कोर्ट में चुनौती के बाद सरकार का यू-टर्न

याचिका में कहा गया कि इस शर्त से निजी मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत अनुभवी प्रोफेसरों व शिक्षाविदों के लिए कुलपति पद के अवसर...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 08:30:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 08:30:00 PM (IST)
बदलेगी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुलपति नियुक्ति की शर्त, हाई कोर्ट में चुनौती के बाद सरकार का यू-टर्न
मध्‍य प्रदेश हाई कोर्ट।

HighLights

  1. याचिका में कहा गया कि इस शर्त से निजी मेडिकल कॉलेजों
  2. अनुभवी प्रोफेसरों के लिए कुलपति पद के अवसर बंद हो गए।
  3. इसे याचिकाकर्ता ने मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, एमयू के कुलपति की नियुक्ति में सरकारी मेडिकल कालेज में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य करने वाली शर्त पर सरकार अब पीछे हटेगी।

हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रविधान को हटाने के लिए विधानसभा में नया विधेयक लाया जाएगा। बिल पारित होने के बाद कुलपति नियुक्ति की पूर्व व्यवस्था फिर लागू हो जाएगी।

हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सरकार के बयान को रिकार्ड पर लेते हुए विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई सात अगस्त को होगी।

दरअसल, जबलपुर के सुखसागर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर पंकज कमल धरडे ने एमपी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, संशोधन अधिनियम, 2023 को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

संशोधन के तहत कुलपति पद के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया था।

याचिका में कहा गया कि इस शर्त से निजी मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत अनुभवी प्रोफेसरों व शिक्षाविदों के लिए कुलपति पद के अवसर बंद हो गए।

इसे याचिकाकर्ता ने मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया है। सरकार के रुख में बदलाव के बाद हाई कोर्ट ने याचिका को संबंधित प्रकरण के साथ टैग कर संयुक्त सुनवाई के निर्देश दिए हैं।