
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश, करीब दो साल का इंतजार और फिर विभागीय जिम्मेदारी सौंपने की पहल। जिला स्वास्थ्य विभाग में जिला कम्युनिटी मोबिलाइजर प्रवीण सोनी से जुड़ा मामला प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
हाई कोर्ट के 29 अगस्त 2024 के अंतरिम आदेश के बाद अब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. नवीन कोठारी ने 23 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर सोनी को शहरी आशा कार्यकर्ताओं से संबंधित जिला स्तरीय कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रवीण सोनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य सहित अन्य प्रकरण में न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई तक सेवा में बनाए रखने का अंतरिम निर्देश दिया था। आदेश में पूर्व में मिले अंतरिम संरक्षण और सेवा समाप्ति से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया गया था।
सोनी की सेवाएं 22 जनवरी 2020 को समाप्त की गई थीं। इस आदेश को हाई कोर्ट ने याचिका में निरस्त कर दिया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसके बाद भी सेवा समाप्ति से जुड़ा विवाद जारी रहा और उन्हें दोबारा न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सीएमएचओ कार्यालय के 23 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, जिले में आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में आ रही समस्याओं और शिकायतों को देखते हुए प्रवीण सोनी को जिला स्तर की शहरी आशा कार्यकर्ताओं से संबंधित समस्त कार्य तथा शहरी क्षेत्र की सीएम हेल्पलाइन से जुड़े प्रकरणों के निराकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब सवाल यह है कि जब याचिकाकर्ता को सेवा में बनाए रखने का अंतरिम संरक्षण प्राप्त था, तो निर्धारित पदीय दायित्व सौंपने में इतना समय क्यों लगा? क्या इस अवधि में विभागीय स्तर पर आदेश के अनुपालन की समीक्षा की गई। यदि निर्धारित कार्य नहीं सौंपे गए, तो इसके कारणों और जिम्मेदारी का परीक्षण कौन करेगा।
फिलहाल, 23 अक्टूबर के आदेश से प्रवीण सोनी को कार्यदायित्व सौंप दिए गए हैं। हालांकि, पूर्व अवधि में विभागीय कार्रवाई, आदेश के अनुपालन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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