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'सुप्रीम' निर्देशों का हवाला, एमपी-एमएलए के मुकदमे वापस लेने की अर्जी पर HC ही करेगा फैसला

सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को जनहित याचिकाओं के माध्यम से निगरानी रखने के निर्देश दिए थे।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 10:46:32 AM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 11:00:09 AM (IST)
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'सुप्रीम' निर्देशों का हवाला, एमपी-एमएलए के मुकदमे वापस लेने की अर्जी पर HC ही करेगा फैसला
सुनवाई में लंबित प्रकरणों और अभियोजन वापसी के आवेदनों की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के दिशा-निर्देशों का हवाला
  2. युगलपीठ ने किया स्पष्ट निर्देश, अगली सुनवाई 16 नवंबर को
  3. एमपी-एमएलए विशेष अदालत में लंबित अभियोजन वापसी के 17 आवेदन

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की अनुमति देने का अधिकार हाई कोर्ट के पास रहेगा। एमपी-एमएलए विशेष अदालत में लंबित ऐसे मामलों में अभियोजन वापसी के आवेदनों पर अब हाई कोर्ट विचार करेगा।

अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिसंबर 2025 में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए यह स्थिति स्पष्ट की। युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की है।


अभियोजन वापस लिए जाने की जानकारी भी प्रस्तुत की

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह उपस्थित हुए। उन्होंने युगलपीठ को बताया कि एमपी-एमएलए विशेष अदालत में लंबित 17 प्रकरणों में अभियोजन वापसी की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। इन पर सुनवाई लंबित है। इसके अलावा एक अन्य प्रकरण में अभियोजन वापस लिए जाने की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।

संज्ञान याचिका की सुनवाई चल रही है

दरअसल, सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को जनहित याचिकाओं के माध्यम से निगरानी रखने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी संज्ञान याचिका की सुनवाई चल रही है।

हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी

पिछली सुनवाई के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत अभियोजन वापसी की अनुमति देने के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न उठा था। सवाल था कि क्या एमपी-एमएलए विशेष अदालत स्वयं अभियोजन वापसी की अनुमति दे सकती है या इसके लिए हाई कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के दिशा-निर्देशों का हवाला

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में अभियोजन वापसी के आवेदन का परीक्षण करने और अनुमति देने का अधिकार हाई कोर्ट के पास है।

आवेदनों की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा

युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख करते हुए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की। अब 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में लंबित प्रकरणों और अभियोजन वापसी के आवेदनों की स्थिति पर आगे विचार किया जाएगा।

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