
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के विखंडन और इसके बड़े हिस्से को अलग कर उज्जैन में नई धन्वंतरि विश्वविद्यालय बनाए जाने के सरकारी निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में 21 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम तथा मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिका कर्ताओं डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव का कहना है कि विश्वविद्यालय का प्रस्तावित पुनर्गठन जबलपुर के साथ भेदभावपूर्ण है।
याचिका के अनुसार पुनर्गठन के बाद उज्जैन की नई विश्वविद्यालय के अधीन छह संभाग, 31 जिले और 80 में से 64 कॉलेज चले जाएंगे। वहीं जबलपुर विश्वविद्यालय के पास चार संभाग, 24 जिले और केवल 16 कॉलेज रह जाएंगे। याचिका में इसे समान और न्यायसंगत पुनर्गठन नहीं बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत बताया गया है।
याचिका में मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध करीब 250 करोड़ रुपये के रिजर्व फंड को उज्जैन स्थानांतरित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई विश्वविद्यालय की स्थापना और संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है, ऐसे में रिजर्व फंड का स्थानांतरण नहीं किया जा सकता। इस राशि के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के विखंडन से पहले विशेषज्ञ अध्ययन, व्यवहार्यता रिपोर्ट और व्यापक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने सरकार से निर्णय से संबंधित कैबिनेट नोट, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सहित अन्य रिकार्ड कोर्ट में पेश कराने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सरकार के जवाब पर इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।
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