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फर्जी जाति प्रमाणपत्र के 47 मामलों में कार्रवाई का सवाल, हाई कोर्ट ने कहा- कानून के मुताबिक सख्ती बरतें

सरकार को प्रत्येक मामले में उपलब्ध रिकाॅर्ड, न्यायिक आदेशों और लागू कानूनी प्रविधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनानी होगी।

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 03:48:56 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 03:48:56 PM (IST)
फर्जी जाति प्रमाणपत्र के 47 मामलों में कार्रवाई का सवाल, हाई कोर्ट ने कहा- कानून के मुताबिक सख्ती बरतें
जहां कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक होगी, वहां कदम उठाए जाएंगे।

HighLights

  1. कानून के अनुसार कार्रवाई की अपेक्षा
  2. प्रमाण पत्र निरस्त करने की सिफारिश
  3. कार्रवाई लंबित होने का आरोप

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोपों से जुड़े 47 मामलों में कार्रवाई लंबित होने का मुद्दा हाईकोर्ट पहुंचा है।

सख्ती से कदम उठाने के निर्देश

प्रमाण पत्र निरस्त करने की सिफारिशों के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने के आरोपों पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कानून के अनुसार सख्ती से कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

कानूनी प्रक्रिया के कारण कार्रवाई में समय लग सकता है

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मामलों की प्रकृति और कानूनी प्रक्रिया के कारण कार्रवाई में समय लग सकता है, लेकिन सरकार से गंभीरता के साथ कार्रवाई की अपेक्षा है। कोर्ट ने कार्रवाई पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की।

47 मामलों में प्रमाण पत्र निरस्तीकरण की सिफारिश

जनहित याचिका इंदौर के गुर्जरखेड़ा निवासी धर्मेन्द्र शुक्ला की ओर से दायर की गई है। याचिका में मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों का मुद्दा उठाया गया है।


हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष 47 मामलों का हवाला दिया गया। दावा किया गया कि इन मामलों में संबंधित जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने और कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इसी को आधार बनाकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।

सुबह सरकार से मांगी स्थिति, लंच बाद फिर सुनवाई

मामले की सुनवाई दो चरणों में हुई। सुबह की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार गुप्ता और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी उपस्थित हुए। युगलपीठ ने उप महाधिवक्ता को सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

लंच के बाद हुई सुनवाई

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के पक्ष में अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी हैं, जिसके कारण कार्रवाई में देरी हुई है। सरकार ने यह भी कहा कि प्रत्येक मामले का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा और जहां कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक होगी, वहां कदम उठाए जाएंगे।

निश्चित समय-सीमा तय नहीं

हाई कोर्ट ने कार्रवाई पूरी करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की। युगलपीठ ने माना कि अलग-अलग मामलों की जांच, अभिलेखों के परीक्षण और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में समय लग सकता है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार से अपेक्षा की कि वह फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में गंभीरता और सख्ती के साथ कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।

सरकारी कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी

कोर्ट के निर्देश के बाद अब याचिका में बताए गए 47 मामलों समेत संबंधित अन्य प्रकरणों में सरकारी कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। सरकार को प्रत्येक मामले में उपलब्ध रिकाॅर्ड, न्यायिक आदेशों और लागू कानूनी प्रविधानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनानी होगी।

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