
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव से लेकर सड़कों पर यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण तक, प्रशासन की जिम्मेदारी तय कर दी है।
अब जबलपुर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम संभालेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी की ओर से प्रत्येक सिग्नल के लिए सालाना 1.50 लाख रुपए नगर निगम को दिए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार की ओर से प्रस्तुत 27 जुलाई को हुई संयुक्त बैठक के मिनिट्स पर विचार करने के बाद यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जहां अतिक्रमण अथवा अन्य किसी अवरोध के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर उसे हटाया जाए।
सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि हाई कोर्ट के 10 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में 27 जुलाई को कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें कलेक्टर व जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के को-चेयरमैन, नगर निगम आयुक्त, स्मार्ट सिटी के सीईओ तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात शामिल हुए।
बैठक में तय किया गया कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का रखरखाव नगर निगम करेगा। इसके एवज में ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी प्रत्येक सिग्नल के लिए सालाना 1.50 लाख रुपए उपलब्ध कराएंगे। नगर निगम को जिम्मेदारी मिलने के बाद सिग्नलों के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।
कोर्ट ने केवल सिग्नलों के संचालन तक मामला सीमित नहीं रखा। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में यातायात का प्रवाह निर्बाध रखा जाए। सड़क, चौराहे या अन्य स्थानों पर अतिक्रमण अथवा कोई दूसरा अवरोध यातायात में बाधा बन रहा हो तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और समाजसेवी रजत भार्गव ने दायर की है। याचिका में कहा गया कि शहर के विभिन्न चौराहों पर लगाए गए कई ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद हैं। इससे यातायात जाम की समस्या बढ़ रही है और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दावा किया गया कि सिग्नल चालू रहने के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान जारी होते थे, जिससे सरकार को प्रतिमाह करीब पांच लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता था। सिग्नलों के लंबे समय से बंद रहने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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हाई कोर्ट ने फिलहाल अधिकारियों को यातायात व्यवस्था सुधारने और ट्रैफिक में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमण व अन्य अवरोधों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।