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ट्रैफिक व्यवस्था पर हाई कोर्ट सख्त, जबलपुर नगर निगम संभालेगा सिग्नलों का रखरखाव, अतिक्रमण हटाने के निर्देश

अब जबलपुर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम संभालेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी की ओर से प्रत्येक सिग्नल के...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 01 Aug 2026 03:13:50 PM (IST)Updated Date: Sat, 01 Aug 2026 03:13:50 PM (IST)
ट्रैफिक व्यवस्था पर हाई कोर्ट सख्त, जबलपुर नगर निगम संभालेगा सिग्नलों का रखरखाव, अतिक्रमण हटाने के निर्देश
जबलपुर के ट्रैफिक सिग्नलों के लिए अब जिम्मेदारी तय।

HighLights

  1. जबलपुर के ट्रैफिक सिग्नलों के लिए अब जिम्मेदारी तय
  2. बंद ट्रैफिक सिग्नलों और अतिक्रमण पर हाई कोर्ट सख्त
  3. यातायात जनहित याचिका पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव से लेकर सड़कों पर यातायात में बाधा बनने वाले अतिक्रमण तक, प्रशासन की जिम्मेदारी तय कर दी है।

ट्रैफिक व्यवस्था की जिम्मेदारी अब नगर निगम की

अब जबलपुर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम संभालेगा। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और जबलपुर स्मार्ट सिटी की ओर से प्रत्येक सिग्नल के लिए सालाना 1.50 लाख रुपए नगर निगम को दिए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।


प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार की ओर से प्रस्तुत 27 जुलाई को हुई संयुक्त बैठक के मिनिट्स पर विचार करने के बाद यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जहां अतिक्रमण अथवा अन्य किसी अवरोध के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर उसे हटाया जाए।

बैठक के बाद तय हुई जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि हाई कोर्ट के 10 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में 27 जुलाई को कलेक्टर की अध्यक्षता में संयुक्त बैठक हुई थी। इसमें कलेक्टर व जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के को-चेयरमैन, नगर निगम आयुक्त, स्मार्ट सिटी के सीईओ तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात शामिल हुए।

बैठक में तय किया गया कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नलों का रखरखाव नगर निगम करेगा। इसके एवज में ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी प्रत्येक सिग्नल के लिए सालाना 1.50 लाख रुपए उपलब्ध कराएंगे। नगर निगम को जिम्मेदारी मिलने के बाद सिग्नलों के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।

अतिक्रमण से ट्रैफिक बाधित हुआ तो कार्रवाई

कोर्ट ने केवल सिग्नलों के संचालन तक मामला सीमित नहीं रखा। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में यातायात का प्रवाह निर्बाध रखा जाए। सड़क, चौराहे या अन्य स्थानों पर अतिक्रमण अथवा कोई दूसरा अवरोध यातायात में बाधा बन रहा हो तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

बंद सिग्नलों को लेकर दायर हुई थी पीआईएल

यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और समाजसेवी रजत भार्गव ने दायर की है। याचिका में कहा गया कि शहर के विभिन्न चौराहों पर लगाए गए कई ट्रैफिक सिग्नल लंबे समय से बंद हैं। इससे यातायात जाम की समस्या बढ़ रही है और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दावा किया गया कि सिग्नल चालू रहने के दौरान यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान जारी होते थे, जिससे सरकार को प्रतिमाह करीब पांच लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता था। सिग्नलों के लंबे समय से बंद रहने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

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सितंबर में फिर होगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने फिलहाल अधिकारियों को यातायात व्यवस्था सुधारने और ट्रैफिक में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमण व अन्य अवरोधों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।