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दल-बदल विवाद में कांग्रेस को हाई कार्ट से झटका, बीना विधायक निर्मला सप्रे मामले में स्पीकर को निर्देश देने से इंकार

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि कांग्रेस से निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध दल-बदल कानून के तहत ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 07:13:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 07:17:52 PM (IST)
दल-बदल विवाद में कांग्रेस को हाई कार्ट से झटका, बीना विधायक निर्मला सप्रे मामले में स्पीकर को निर्देश देने से इंकार
निर्मला सप्रे।

HighLights

  1. बीना विधायक निर्मला सप्रे मामले में स्पीकर को निर्देश देने से इंकार।
  2. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की याचिका निरस्त कर दी।
  3. मंच शेयर कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का लगा आरोप।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने बीना विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े बहुचर्चित दल-बदल विवाद में कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को मामले का शीघ्र निपटारा करने अथवा कोई विशेष निर्देश जारी करने से इंकार करते हुए याचिका निरस्त कर दी।

कोर्ट ने साफ किया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत दायर आवेदन पर विधिसम्मत सुनवाई जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। ऐसे में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।


दरअसल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि कांग्रेस से निर्वाचित विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई कर उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाए।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच साझा कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हुईं और व्यवहारिक रूप से भाजपा का समर्थन करती रहीं।

विधायक सप्रे ने जवाब में कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की :

  • वहीं विधायक सप्रे ने जवाब में कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है तथा उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।
  • राज्य शासन ने भी कोर्ट को अवगत कराया कि विधानसभा अध्यक्ष मामले की सुनवाई कर रहे हैं और कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिससे न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़े।
  • 18 जून को फैसला सुरक्षित रखने के बाद कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी।
  • सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, विधायक सप्रे की ओर से अधिवक्ता संजय अग्रवाल तथा याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पैरवी की।