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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी पर भोपाल निगमायुक्त अवमानना की दोषी, हाईकोर्ट में सजा पर सुनवाई आज

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Fri, 06 Feb 2026 07:33:00 AM (IST)Updated Date: Fri, 06 Feb 2026 07:33:00 AM (IST)
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की अनदेखी पर भोपाल निगमायुक्त अवमानना की दोषी, हाईकोर्ट में सजा पर सुनवाई आज
हाईकोर्ट ने भोपाल निगमायुक्त को अवमानना का दोषी करार दिया

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने साफ किया कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। लिहाजा, आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा। इस सिलसिले में शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे से सुनवाई होगी।

क्या है मामला

दरअसल, यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर, 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को विहित प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था। सात नवंबर, 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई, 2025 को नोटिस जारी किया था, इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया

हाई कोर्ट ने माना 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को नैसर्गिक न्याय सिद्धांत अनुरूप न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर न ही दिया गया, न ही सुनवाई की कोई कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके स्थान पर सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो अवैधानिक है।

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया

हाई कोर्ट ने जवाब सुन अपनाया कड़ा रुख। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि यदि बिना शर्त माफी के साथ तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता था। लेकिन नगर निगम आयुक्त ने अदालत में स्पष्ट किया कि निर्माण को बहाल करना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।

आज सजा पर सुनवाई

हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराया है। इस मामले में शुक्रवार, छह फरवरी को सुबह 10:30 बजे सजा के बिंदु पर सुनवाई की जाएगी।

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