
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। 1984 के सिख विरोधी दंगों की पीड़ित बुजुर्ग महिला को हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति संजीव कालगांवकर की एकलपीठ ने सीहोर जिला प्रशासन द्वारा सात लाख 23 हजार 800 रुपये की राहत राशि वापस लेने के आदेश और रिकवरी नोटिस को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संकट के समय सरकार द्वारा दी गई राहत कानूनी मुआवजा नहीं, बल्कि मानवीय सहायता होती है। इसे बाद में वापस नहीं वसूला जा सकता।
मामला सीहोर निवासी गुरुचरण कौर रात्रा की याचिका से जुड़ा है। वर्ष 1984 के दंगों में उनकी संपत्ति को नुकसान हुआ था। उन्होंने 9 मई 2013 को मुआवजे के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने पहले मिले पांच हजार रुपये और नानावटी आयोग की सिफारिश पर मिले 45 हजार रुपये की जानकारी भी दी थी। जांच के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने 7.23 लाख रुपये स्वीकृत कर राशि का भुगतान कर दिया।
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बाद में प्रशासन ने शिकायत के आधार पर राशि की रिकवरी शुरू कर दी। हाई कोर्ट ने पाया कि कलेक्टर और अपर कलेक्टर ने रिकार्ड की समुचित जांच किए बिना कार्रवाई की। कोर्ट ने वसूली आदेश निरस्त करते हुए प्रशासन को बुजुर्ग महिला को हुई परेशानी के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।