
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में राज्य सरकार की कानूनी पैरवी व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण संस्थागत विवाद सामने आया है। मामला उन स्टैंडिंग काउंसिलों से जुड़ा है जिन्हें राज्य शासन ने नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट एवं अन्य न्यायिक मंचों के लिए नियुक्त किया है।
याचिकाकर्ता योगेश सोनी की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने दलील दी कि 18 मार्च, 2026 को अंतिम अवसर दिए जाने के बावजूद शासन ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है।
हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता नीलेश अवस्थी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत चौरसिया ने आवेदन पेश कर दावा किया कि नई दिल्ली के लिए नियुक्त कुछ स्टैंडिंग काउंसिल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी राज्य की ओर से पेश हो रहे हैं, जबकि उनकी नियुक्ति सीमित एवं विशिष्ट प्रकृति की बताई गई है।
मुख्य न्यायाधीश के आदेश से गठित विशेष युगलपीठ के सदस्य न्यायमूर्ति मनींदर सिंह भट्टी व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा ने राज्य शासन को जवाब दाखिल करने का अवसर देते हुए स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत नहीं होने पर मामले के प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) की व्यक्तिगत उपस्थिति पर विचार किया जा सकता है।
आवेदन में राज्य सरकार की नियुक्ति नीति, अधिकार-क्षेत्र, प्राधिकरण और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश सार्वजनिक करने की मांग की गई है। मामले ने राज्य की कानूनी प्रतिनिधित्व प्रणाली में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के सवालों को केंद्र में ला दिया है।