
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने डिंडौरी में दो किसानों की जमीन पर कथित तौर पर बिना अधिग्रहण और मुआवजा दिए सड़क निर्माण के मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने प्रथमदृष्टया टिप्पणी की कि राज्य सरकार की ओर से मामले में इंटेलेक्चुअल डिसआनेस्टी यानी बौद्धिक बेईमानी दिखाई दे रही है।
हाई कोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ पुराने और नए राजस्व नक्शे तथा खसरा नंबर 1181 और 1106 की सीमांकन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। दस्तावेज समय पर नहीं आए तो कलेक्टर को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा।
मामला बजाग तहसील के मोहतरा गांव के अंबिका प्रसाद तिवारी और जितेंद्र तिवारी की जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार खसरा 1181 की 1.410 हेक्टेयर और खसरा 1106 की 0.11 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। आरोप है कि बिना वैधानिक अधिग्रहण और मुआवजे के नेशनल हाईवे का निर्माण कर दिया गया।
सरकार ने राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पेश की, जिसमें खसरा 1181 में 0.192 हेक्टेयर कमी बताई गई और इसकी भरपाई खसरा 1260 से करने की बात कही गई। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि सड़क पुराने सर्वे नंबर 107 पर है तो आसपास की निजी जमीन की वास्तविक स्थिति निर्धारित करने वाला नक्शा और सीमांकन कहां है?
बेंच ने रिकार्ड को प्रथम दृष्टया हाच-पाच और फैब्रिकेटेड रिपोर्ट जैसा बताया। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धर्मेश चतुर्वेदी ने नायब तहसीलदार की रिपोर्ट को भी कूटरचित बताया। उन्होंने 24 अप्रैल 2024 की राजस्व निरीक्षक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें 0.20 हेक्टेयर जमीन प्रभावित होना बताया गया था।
कोर्ट ने कलेक्टर को 14 अगस्त तक दस्तावेज पेश करने और यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
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