मध्यप्रदेश हाई कोर्ट सख्त: साइबर अपराध मामले में असम, झारखंड और बंगाल के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से बुलाया
हाई कोर्ट ने साइबर अपराधों की सुस्त जांच पर नाराजगी जताते हुए असम, झारखंड और बंगाल के डीजीपी को व्यक्तिगत तौर पर तलब किया है। कोर्ट ने रियल टाइम जांच ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 11:06:47 AM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 04:38:23 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- तीन राज्यों के पुलिस प्रमुखों को हाई कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश।
- बैंक, टेलीकॉम और पुलिस के बीच तालमेल की कमी अपराधियों को मिल रही ढाल।
- हाई कोर्ट का मानना है कि साइबर अपराध के लिए अब एक राष्ट्रव्यापी त्वरित व्यवस्था अनिवार्य।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर : हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने असम, झारखंड और पश्चिम बंगाल के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।साइबर अपराध से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। दरअसल, साइबर अपराधों की जांच व्यवस्था पर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि डिजिटल अपराधों में अपराधियों से तेज गति से काम करना ही सफलता की कुंजी है।
जांच में जरा-सी देरी भी अपराधियों को रकम गायब करने, डिजिटल साक्ष्य मिटाने और कानून की पकड़ से दूर होने का मौका दे देती है। साइबर अपराध पारंपरिक अपराधों से पूरी तरह अलग हैं। इनमें पीड़ित की तत्काल शिकायत, बैंकों द्वारा खातों को तुरंत फ्रीज करना, टेलीकाम कंपनियों व इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से रियल टाइम जानकारी मिलना और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच त्वरित समन्वय बेहद जरूरी है। प्रक्रिया के किसी भी चरण में देरी सीधे अपराधियों को फायदा पहुंचाती है।
जबलपुर एसपी ने कई दिन लगने की समस्या की रेखांकित सुनवाई के दौरान एसपी जबलपुर ने बताया कि अलग-अलग बैंकों, टेलीकाम एजेंसियों सहितअन्य राज्यों से तकनीकी जानकारी जुटाने में कई दिन लग जाते हैं। तब तक आरोपित ठिकाना बदल लेते हैं, ठगी की रकम निकाल लेते हैं और इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी मिटा देते हैं।
हाई कोर्ट ने माना कि साइबर अपराधों की जांच के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और रिजर्व बैंक आफ इंडिया को पक्षकार बनाया गया है।