• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

ट्रांसफर पर हाई कोर्ट सख्त : चार साल की छूट खत्म, अब नहीं मिलेगा संरक्षण, अमर्यादित बहस पर वकील पर 10 हजार जुर्माना

याचिकाकर्ता का कहना था कि वे कर्मचारी संघ के पदाधिकारी हैं, उनके वृद्ध माता-पिता हैं, उनके निर्देशन में आठ शोधार्थी कार्यरत हैं तथा करीब 800 विद्यार्थ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 01:36:17 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 01:36:17 PM (IST)
ट्रांसफर पर हाई कोर्ट सख्त : चार साल की छूट खत्म, अब नहीं मिलेगा संरक्षण, अमर्यादित बहस पर वकील पर 10 हजार जुर्माना
हाई कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी अपनी पसंद की जगह पर बने रहने का अधिकार नहीं जता सकता।

HighLights

  1. एक ही स्थान पर पदस्थ रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता
  2. तबादले से छूट पाने वाले एक प्राध्यापक को राहत नहीं दी है
  3. स्थानांतरण सरकारी सेवा का सामान्य हिस्सा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कर्मचारी संघ के पदाधिकारी होने के आधार पर वर्षों तक तबादले से छूट पाने वाले एक प्राध्यापक को राहत नहीं दी है।

राज्य सरकार के विरुद्ध अमर्यादित भाषा के प्रयोग पर सजा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के विरुद्ध अमर्यादित भाषा के प्रयोग पर अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पर 10 हजार का जुर्माना लगा दिया है। कोर्ट ने आदेश में साफ किया कि स्थानांतरण सरकारी सेवा का सामान्य हिस्सा है और कार्यकाल पूरा होने के बाद कर्मचारी अपनी पसंद की जगह पर बने रहने का अधिकार नहीं जता सकता।

क्या कहा कोर्ट ने

  • ट्रांसफर प्रशासनिक अधिकार, न्यायिक हस्तक्षेप सीमित।
  • चार वर्ष की विशेष छूट अवधि समाप्त।
  • वृद्ध माता-पिता या छात्रों की संख्या संरक्षण का आधार नहीं।
  • वकील की अमर्यादित भाषा पर 10 हजार जुर्माना।

बहोरीबंद महाविद्यालय किए गए तबादले को चुनौती दी थी

हाई कोर्ट ने डा. एमयू सिद्दीकी की वह याचिका निरस्त कर दी है, जिसमें उन्होंने सिंगरौली के शासकीय राजनारायण स्मृति महाविद्यालय बैढ़न से कटनी जिले के बहोरीबंद महाविद्यालय किए गए तबादले को चुनौती दी थी।

स्थानांतरण से छूट की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई

अदालत ने पाया कि इन्हीं कारणों से उन्हें पूर्व में चार वर्षों तक स्थानांतरण से छूट मिल चुकी थी और यह अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। महाविद्यालय में शिक्षण व्यवस्था कैसे संचालित होगी और किस अधिकारी को प्रतिस्थापित किया जाएगा, यह प्रशासनिक निर्णय का विषय है।


किसी वैधानिक या मौलिक अधिकार का हनन नहीं हुआ

कोर्ट ने कहा कि तबादला आदेश से याचिकाकर्ता के किसी वैधानिक या मौलिक अधिकार का हनन नहीं हुआ है। न तो स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का कोई प्रमाण है और न ही कोई प्रतिकूल नागरिक परिणाम सामने आया है। ऐसे मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप अपवाद स्वरूप ही संभव है।

सुनवाई का अहम पहलू

आदेश में कोर्ट ने विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने राज्य सरकार के विरुद्ध अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और अनावश्यक रूप से विवाद को अदालत तक खींचा। इसे अनुचित मानते हुए अधिवक्ता पर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया, जो 30 दिन के भीतर मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में जमा करना होगा।

कानूनी संदेश

ट्रांसफर कोई दंड नहीं, प्रशासनिक आवश्यकता है और अदालतें तब तक हस्तक्षेप नहीं करेंगी, जब तक स्पष्ट वैधानिक उल्लंघन सिद्ध न हो।

यह भी पढ़ें- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे पर जबलपुर में दो दिन रहेगा नो फ्लाइंग जोन, 21 जून को तीन बड़े आयोजन