
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों की समस्या और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट अब राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने तीन नवंबर को दोपहर 2:30 बजे अगली सुनवाई निर्धारित की।
समीक्षा के बाद हाई कोर्ट की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। शीर्ष अदालत में मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान बेंच ने कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा और अधिवक्ता सरबवीर सिंह ओबेराय से सरकार के जवाब पर सुझाव मांगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता डिसिल्वा ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को संतोष जनक बताया। बेंच ने कहा कि तीन नवंबर को रिपोर्ट पर विस्तृत सुनवाई कर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
राज्य के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की ओर से प्रस्तुत जवाब में बताया गया कि पिछले छह माह में प्रदेश में 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है।
सरकार ने सार्वजनिक परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और निगरानी के लिए किए गए उपायों की जानकारी भी दी है।
सरकार ने बताया कि खाद्य सामग्री विक्रेताओं को खाद्य अपशिष्ट का उचित निपटान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें कचरा बंद डस्टबिन में रखने तथा खान-पान के स्टॉल के आसपास आवारा कुत्तों को भोजन नहीं कराने की सलाह दी जा रही है।
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त और सात नवंबर, 2025 को निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 19 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट ने मामला दर्ज कर राज्य सरकार से आवारा कुत्तों की रोकथाम, नसबंदी, टीकाकरण और सार्वजनिक परिसरों की सुरक्षा के संबंध में उठाए गए कदमों का विवरण मांगा था। अब तीन नवंबर को सरकार के जवाब और उपायों की प्रभावशीलता की समीक्षा होगी।
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