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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मैहर के जज की सर्विस बुक में चेतावनी दर्ज करने के हाई कोर्ट के निर्देश

पक्षपात पूर्ण फैसले दिए जाने पर हाई कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की सर्विस बुक में चेतावनी दर्ज किए जाने के निर्देश दिए हैं।

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 14 Apr 2022 09:10:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 Apr 2022 09:10:00 AM (IST)
मैहर के जज की सर्विस बुक में चेतावनी दर्ज करने के हाई कोर्ट के निर्देश

जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट ने एक आपराधिक प्रकरण में मैहर की अधीनस्थ अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पक्षपात पूर्ण फैसले पर आश्चर्य जताया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने संबंधित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की सर्विस बुक में चेतावनी अंकित करने के निर्देश दिए। हाई कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को हिदायत दी कि वे आगे से ऐसे प्रकरणों में सजग रहें ताकि न्यायपालिका की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके।

यह है मामला :

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने उस आरोपित को जमानत दे दी, जिसके पास से चोरी का माल बरामद हुआ, जबकि दूसरे आरोपित को जमानत देने से इन्कार कर दिया। मैहर निवासी इंद्रजीत पटेल ने हाई कोर्ट में दूसरी बार जमानत अर्जी पेश की।


आवेदक की ओर से अधिवक्ता उमाशंकर जायसवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मैहर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शुक्ला ने 12 फरवरी, 2022 को चोरी के मुख्य आरोपित अजय उर्फ गुड्डू मिश्रा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली थी, जबकि पुलिस को उसके कब्जे से चोरी की मोटरसाइकिल मिली थी। वहीं आवेदक इस मामले में सह आरोपित था और उसके कब्जे से कुछ नहीं मिला था। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपित अजय मिश्रा के खिलाफ छह आपराधिक प्रकरण लंबित हैं, जिनमें से एक में भी सजा नहीं मिली है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत में अजय मिश्रा की अपेक्षा आवेदक का मामला जमानत के लिए अधिक मजबूत था। हाई कोर्ट ने आवेदक की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए संबंधित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ उक्त कार्रवाई के निर्देश दिए।