
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत ने समूचे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इंदौर की इस घटना के बाद जबलपुर नगर निगम की बदहाल पेयजल आपूर्ति व्यवस्था ने शहर के नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है। क्योंकि शहर में करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाला-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं। जिससे जबलपुर में भी इंदौर जैसे हालात बनने की संभावनाओं को बल मिल रहा है।
इंदौर की घटना सामने आने के बाद जबलपुर नगर निगम के जिम्मेदार जागे और स्वास्थ्य विभाग और जल विभाग की संयुक्त टीमों बनाकर शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेना शुरू कर दिया है। परंतु एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम सुस्त पड़ गई।
पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र वैसे तो 20 साल होती है परंतु अधिकांश लाइनों को 40 से 50 वर्ष तक हो चुके हैं। धनवंतरि नगर, शांतिनगर, इंदिरा मार्केट, रद्दीचौकी, अधारताल, कांचघर, सिद्धबाबा, गौतम जी मढ़िया गढ़ा सहित अधिकांश क्षेत्रों में नाली-नालियों से गुजर रही जलवितरण लाइन में लीकेज होने शिकायतें आती रहती हैं।
सालों से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है। यही कारण है कि बरसात में गंदे, बदबूदार पानी की शिकायतें भी आ चुकी है।