जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मदनमहल पहाड़ी का नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को निर्धारित की है।

जबलपुर निवासी किशोरीलाल भलावी और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मदनमहल पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो गए हैं। याचिका में अतिक्रमण को हटाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट के निर्देश पर समय-समय पर अतिक्रमण हटाए गए थे। इसके साथ ही तालाबों के संरक्षण की भी मांग की गई थी। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता जकी अहमद ने दलील दी कि मदनमहल पहाड़ी पर फिर से अतिक्रमण कर लिया गया है। अतिक्रमणकारी मुफ्त में बिजली और पानी का उपयोग कर रहे हैं। यह सब जिला प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी के कारण हो रहा है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि मदनमहल पहाड़ी में नगर निगम और वन विभाग की ओर से 30 हजार पौधे लगाए गए हैं। सुनवाई के बाद डिवीजन बैंच ने मदनमहल पहाड़ी का नए सिरे से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है।

बंटवारे का वाद नहीं हो सकता खारिज, स्व. परमानंद भाई पटेल की संपत्ति के मामले पर कोर्ट ने कहा : जिला अदालत ने उद्योगपति स्व. परमानंद भाई पटेल की बड़ी पुत्री नीना पटेल द्वारा दायर बंटवारे का सिविल सूट खारिज करने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बंटवारे का वाद खारिज नही किया जा सकता। नीना पटेल ने अपने स्व. पिता की सम्पत्ति के बंटवारे के लिए कोर्ट में यह सिविल सूट दायर किया गया। अनावेदक पक्ष की ओर से कोर्ट में पार्टिशन का मुक़द्दमा निरस्त करने की मांग की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह मांग निरस्त कर दी। कोर्ट ने नीना पटेल के पक्ष में आदेश दिया कि एक पार्टिशन सूट निरस्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नीनादेवी पटेल को मुकदमा चालू रखने की अनुमति दी।

Posted By: Brajesh Shukla

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