• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jabalpur News: आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में 87:13 के फार्मूले के अंतर्गत नियुक्तियों को चुनौती

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी परीक्षा-2021 के रिजल्ट में विसंगति को लेकर सागर निवासी सुरेंद्र कुमार विश्वकर्मा, भोपाल निवासी स्मिता पटेल, राजगढ़ के मनीष भ...और पढ़ें

By Paras PandeyEdited By: Paras Pandey
Publish Date: Mon, 08 Apr 2024 08:33:50 PM (IST)Updated Date: Mon, 08 Apr 2024 08:33:50 PM (IST)
Jabalpur News: आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में 87:13 के फार्मूले के अंतर्गत नियुक्तियों को चुनौती

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने मप्र लोकसेवा आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
  2. आगामी सुनवाई 18 अप्रैल को, महाधिवक्ता की उपस्थिति के निर्देश

जबलपुर, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट में याचिका के जरिये आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में 87:13 के फार्मूले के अंतर्गत दी गई नियुक्तियों को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने इस सिलसिले में मप्र लोकसेवा आयोग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस दिन महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को आवश्यक रूप से उपस्थित रहने कहा है।

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी परीक्षा-2021 के रिजल्ट में विसंगति को लेकर सागर निवासी सुरेंद्र कुमार विश्वकर्मा, भोपाल निवासी स्मिता पटेल, राजगढ़ के मनीष भंडारी सहित अन्य की ओर से याचिका दायर की गई है।

naidunia_image

सभी याचिकाकर्ता आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी 2021 में मेरिटोरियस अभ्यर्थी हैं। याचिकाकर्ताओं के मुख्य परीक्षा में अधिक प्राप्तांक हैं, जिससे इनका चयन 87 प्रतिशत की मुख्य चयन सूची में किया गया।

अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, रामेश्वर सिंह ठाकुर, पुष्पेंद्र शाह व रूप सिंह मरावी ने दलील दी कि साक्षात्कार के समय लोक सेवा आयोग द्वारा अवैधानिक रूप से याचिकाकर्ताओं से अभिवचन पत्र पर हस्ताक्षर कराया गया। इससे इनका मेरिट के आधार पर चयनित होने का संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो गया और ये अधिकार आयोग को मिल गए।


आयोग द्वारा उक्त अभ्यर्थियों के साथ साथ किसी भी अभ्यर्थियों के अंक तथा मेरिट रैंक भी घोषित नहीं की है, जिससे समस्त भर्तियां संदेह के दायरे में हैं। उन्होंने बताया कि 87:13 के फार्मूले के चलते ये अभ्यर्थी मेरिट होने के बावजूद दावा नहीं कर पाएंगे।