
जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जर्मन शेफर्ड को ग्वारीघाट के आगे कालीघाट में छोडा गया था। जहां खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं था। लैब्राडोर को शोभापुर के पास टेस्टिंग रोड के पास जंगल के पास छोडा गया था। बुल डॉग को विजय नगर घडी चौक के पास छोडा गया था। इन तीनों डॉग के बारे में जब डॉग प्रेमियों को पता चला, तो वह उसकी तलाश करने पहुंचे और डॉग की तलाश कर उनकी खाने पीने की व्यवस्था की। वहीं कुछ दिन उनकी देखरेख करने के बाद उन्हें अपने परिचितों को पालने के लिए दिया। ताकि उनकी अच्छी देखरेख होती रहे। यह कार्य स्ट्रीट एनिमल लवर गु्रप की स्नेहा सिंह, सत्यम और अन्य सदस्य कर रहे है।
तेजी से चल रहा व्यापार : स्ट्रीट एनिमल लवर गु्रप की स्नेहा सिंह ने बताया कि उंची नसल के डॉग घरों में पालना फैशन बनता जा रहा है। इसके लिए लोग अच्छी कीमतें देने के लिए भी तैयार रहते है। जिसे देखते हुए डॉग का व्यापार शहर में तेजी से बढ रहा है। लेकिन जब डॉग की उम्र ज्यादा हो जाती है, तो फिर उसे ऐसे स्थान पर छोड दिया जाता है कि उसे कुछ भी खाने को नहीं मिलता, जिससे वह कुछ ही दिनों में बीमार हो जाता है और दूसरे जानवर उसका शिकार कर लेते हैं। यह बातें लगातार पता चल रही थी, जिसके लिए डॉग प्रेमी अब ऐसे डॉग की जिम्मेदारी लेते हुए उनको फिर से बेहतर सुविधा देने के लिए प्रयास कर रहे है।
कुछ ऐसे लोग भी है, जो दे रहे सहारा : शहर में कुछ ऐसे लाेग भी है, जो ऐसे डॉग की देखरेख करने की जिम्मेदारी लेकर उन्हें घर में ले जाकर पाल रहे है। गु्रप के सत्यम ने इन डॉग को देखा और उनकी देखरेख कर अपने परिचितों से बातचीत की, जिसके बाद एक डॉग को कटनी का एक व्यक्ति ले गया और दूसरे को शहर में ही एक व्यक्ति ने पाल लिया। वहीं तीसरे डाग के मालिक के बारे में पता चल गया था, जब उससे संपर्क किया, तो वह खुद ही अपने डॉग को ले गया।
ऐसे कई डाॅग है, जिनके बारे में नहीं है जानकारी : इन तीन डॉग के बारे में पता चल गया था। लेकिन ऐसे कई डॉग है, जिन्हें व्यापार करने के बाद छोड दिया जाता है। स्ट्रीट लवर्स ने ऐसे लोगों से अपील की है कि वह डॉग को ऐसी हालत में नहीं छोडे। वह गु्रप में सूचना दें।