जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
खरीफ फसलों की बोनी शुरू होने के पहले ही किसानों के माथे पर चिंता झलक रही है। दरअसल, किसानों को चिंता बीज की है क्योंकि उन्हें अभी तक सरकारी बीज उपलब्ध नहीं हुआ है और बोनी सिर पर है। बीज की कमी के कारण किसान परेशान हैं। 'नईदुनिया' ने ग्रामीण अंचलों का दौरा कर किसानों से चर्चा की तो सभी का कहना था कि बीज की कमी है, बाहर मार्केट में क्रांति धान का बीज 38 सौ और टेन-टेन का बीज 34 सौ रुपए में उपलब्ध हो रहा है। इतना महंगा बीज लेना उनकी बस की बात नहीं है।
हाइब्रिड बीजों का बोल वाला
बताया जा रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बीजों की शॉर्टेज जानबूझकर कर की जाती है, ताकि महंगे दामों में बेचकर मुनाफा कमाया जा सके। इन कंपनियों के बीज में ना तो कोई प्रमाणिकता होती है न ही बीजों की कोई गारंटी। बीज उपलब्ध न होने की स्थिति में किसान मजबूरी के चलते इसे खरीदता है। गौरतलब है कि बीजों का उत्पादन कृषि विभाग कृषि अनुसंधान केंद्रों, बीज निगम के मार्फत करता है। जिसका उत्पादन समितियों के माध्यम से कर किसानों को दिया जाता है।
धान का बीज नहीं
जबलपुर बेल्ट में क्रांति धान सबसे अधिक प्रचलित है लेकिन इसका बीज उपलब नहीं है। तैयार बीज को पहले सरकार और शासकीय समितियों को उत्पादन कर वितरण के लिए उपलब्ध करा दिया गया। लेकिन पर्याप्त मात्रा में उत्पादन ना होने के कारण किसानों तक यह नहीं पहुंच पाया। बाजार में खुले रुप में यही बीच 3800 से लेकर 4000 रुपए प्रति क्विंटल बेचा जा रहा है।
वर्जन... सभी में फोटो है...
सरकारी बीज नहीं मिल रहा है, मजबूरी में बाजार से बीज खरीद रहे हैं परंतु पैसों की तंगी के कारण पूरी जमीन के लिए बीज नहीं खरीद पा रहे हैं।
रमेश पटेल, किसान पिपरिया गांव
बीज मिलेगा तो बोनी करेंगे तो नहीं तो इस साल जमीन खाली रहेगी। सरकारी बीज के लिए पंचायत से लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों के यहां चक्कर काट चुके हैं। बीज नहीं मिल रहा है।
श्याम सिंह गौंड़, किसान रौंसरा
खरीफ की बोनी है इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा धान की बोनी होती है। किसान मजबूर हैं क्योंकि सरकारी बीज नहीं मिल रहा है और न ही इस समस्या की तरफ जनप्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा है।
अर्जुन यादव, किसान चारघाट