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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 21, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jabalpur News : रंगीन मछलियों के व्यवसाय में हैं अपार संभावनाएं

रंगीन मछलियों के व्‍यापार में अपार संभावनाएं हैं। इस व्‍यवसाय को अपनाकर लोग आत्‍मनिर्भर भी बन सकते हैं। सीफा भी इसमें सहयोग कर रहा है।

By Brajesh ShuklaEdited By: Brajesh Shukla
Publish Date: Wed, 21 Jul 2021 06:30:00 AM (IST)Updated Date: Wed, 21 Jul 2021 06:30:18 AM (IST)
Jabalpur News : रंगीन मछलियों के व्यवसाय में हैं अपार संभावनाएं

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय में एक दिवसीय आनलाइन राष्ट्रीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां सजावटी मत्स्य पालन में उद्यमिता विकास अवसर विषय पर बात की गई। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड द्वारा पोषित किया गया है। आयोजन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सीता प्रसाद तिवारी का मार्गदर्शन रहा।

मन को सुकून मिलता है : उद्घाटन में सबसे पहले अधिष्ठाता संकाय व महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरपीएस बघेल ने बताया कि रंगीन मछलियों से वातावरण अच्छा हो जाता है और मन को सुकून भी मिलता है।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. माधुरी शर्मा ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्य अतिथि एडीजी आइसीएआर नई दिल्ली डॉ बीपी मोहंती ने कहा कि रंगीन मछली पालन व्यवसाय में अपार संभावनाएं हैं। इस व्यवसाय को अपनाकर युवा महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विशिष्ट अतिथि व मुख्य वक्ता निदेशक सीफा, भुवनेश्वर डॉ. एसके स्वैन ने रंगीन मछलियों में उद्यमिता विकास की संभावनाओं विषय पर व्याख्यान दिया। मध्यप्रदेश में सीफा के सहयोग से रंगीत मछली पालन के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। विशिष्ट अतिथि कुलसचिव विश्वविद्यालय प्रो. डॉ. एस के जोशी ने बताया कि मध्यप्रदेश का वातावरण रंगीन मछलियों के पालन के लिए उपयुक्त है। इस व्यवसाय को बढ़ाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में सम्मानीय अतिथि प्रभारी निदेश मत्स्य पालन विभाग भरत सिंह ने बताया रंगीन मछलियों के व्यवसाय के क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विशेष उपस्थिति प्रभारी संयुक्त निदेशक मत्स्य पालन केएल मरावी की रही। साथ ही वैज्ञानिक डॉ. बीके महापात्रा, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सिन्हा, डॉ. बी अहिलन, डॉ. श्याम सुंदर दाना व डॉ. एमजीआर ने अपनी बात रखी।


426 प्रतिभागियों ने कराया पंजीयन : कार्यशाला में 426 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया। आभार प्रदर्शन डॉ. प्रीति मिश्रा ने किया। समन्वयक डॉ. माधुरी शर्मा के साथ ही मुकेश कुमार, सुजीत कुमार राय व शुभेंदु द्विवेदी का सहयोग रहा।