
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर शहर के नागरिकों को पीने का शुद्ध पानी मिल रहा है। नगर निगम का दावा है कि नगर निगम की लैब में टेस्टिंग के बाद जलापूर्ति की जाती है। परंतु नगर निगम की पेयजल वितरण व्यवस्था इन दावों को झुठला रही है। हाल ये है कि जलशोधन संयंत्र से टंकियों को भरने और फिर टंकियों से लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने वाली 80 प्रतिशत पाइपलाइन नाला-नालियों के बीच से निकल रही है।
लंबे समय से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है। लीकेज के कारण घरों में लगे नलों से गंदा पानी आने की शिकायत भी मिल रही हैं।
सुबह और शाम की तेज प्रेशर से जलापूर्ति होने के बाद नलों से गंदा पानी आने की शिकायत आ रही है। इसके बाद जब नल बंद हो जाते हैं उसके बाद पाइपलाइनों में जमा पानी में गंदगी और दुर्गंध भी आ रही है। इस पानी को पीना तो दूर निस्तार भी नही किया जा सकता।
शहर के घमापुर, कांचघर क्षेत्र के नागरिकों ने बताया कि सुबह-शाम जब तेज प्रेशर से नल आते हैं, तब पानी गंदा आता है गंदगी का पता नही चलता इसके बाद पानी साफ आता हैं। परंतु नल बंद हो जाने के बाद पाइपलाइन में जमा जो पानी आता है उसमें गंदगी घुली होती है। जिससे ये स्पष्ट होता है कि पाइपलाइन में गंदगी जमा हो गई और लीकेज के कारण नालियों का पानी भी उसमें घुल रहा है।
शहर में स्वच्छ जल आपूर्ति के नाम पर नगर निगम सालाना करीब 12 करोड़ रुपये पाइपलाइनों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च कर रहा है। इसके बावजूद, शहर की जल वितरण व्यवस्था आज भी गंदी नालियों के जाल से मुक्त नहीं हो पाई है। विडंबना यह है कि अधिकांश पाइपलाइनें 50 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं, जिन्हें अब तक नहीं बदला गया है।
क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के कारण नालियों का दूषित पानी रिसाव के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। इसे पीने से नागरिकों में पेट दर्द और संक्रमण जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता गंदा पानी पीने को मजबूर है, जो निगम की कार्यप्रणाली और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह स्थिति घनी बस्तियों में सबसे अधिक देखने मिल रही है।