
आलोक बनर्जी, नईदुनिया, जबलपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) खसरा (मीजल्स) के टीके को लेकर जबलपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों को चौकस रहने व तेजी से कार्य करने का निर्देश जारी कर चुका है। साथ ही लक्ष्य तय समय में पाने जिले का स्वास्थ्य विभाग जागरूकता बढ़ाने के साथ तेजी से टीम जुटी हुई है।
इस साल अप्रैल-अगस्त के बीच पांच माह में करीब 94 प्रतिशत खसरे के टीके बच्चों को लगाए जा चुके हैं। इस तरह 48 हजार टीके के लक्ष्य से थोड़ा पीछे ही है। ताजा रैंकिंग में जबलपुर 51 जिलों में 15वें पायदान पर कायम है।
शहरी की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण का प्रतिशत इसलिए भी अधिक है कि स्वास्थ्य टीम से पालक टीके लगवाते हैं, जबकि शहर में यह टीकाकरण कई पालक निजी में जाकर भी कराते हैं।
गंभीर बीमारियों, जटिलताओं और संक्रमण के तेजी से फैलाव को रोकने के लिए खसरा (मीजल्स) का टीका लगवाना सबसे जरूरी और असरदार उपाय है। खसरा सिर्फ मामूली दाने और बुखार नहीं है।
यह निमोनिया, दिमागी सूजन (इंसेफलाइटिस), अंधापन और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है। खसरे का वायरस हवा और छूने से बहुत तेजी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर यह हवा में घंटों तक सक्रिय रहता है।
एमआर वैक्सीन की दो खुराक लेने से लगभग 95 से 97 प्रतिशत तक सुरक्षा मिलती है। पर्याप्त टीकाकरण से समाज में वायरस का प्रसार रुकता है।
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