
नईदुनिया प्रतिनिधि,जबलपुर। ऐसा ही एक मामला शाहपुरा तहसील क्षेत्र में सामने आया है। ग्राम भीकम्पुर निवासी गिंदा पिता लट्टू उर्फ लटोरा ने कलेक्टर से शिकायत कर आरोप लगाया है कि उसकी करीब 2.85 हेक्टेयर कृषि भूमि की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा दी गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसकी जगह दूसरे व्यक्ति ने जिंदा बनकर दस्तावेजों पर कार्रवाई पूरी की। शिकायत के अनुसार जिंदा के नाम ग्राम भीकम्पुर में खसरा नंबर 30/1 रकबा 1.520 हेक्टेयर और खसरा नंबर 347 रकबा 1.330 हेक्टेयर भूमि दर्ज थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह इन जमीनों पर कृषि कार्य करता रहा है और उसने कभी इन्हें बेचने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक 30 जुलाई 2026 को दोनों जमीनों की बिक्री संबंधी दस्तावेज पंजीकृत कर दिए गए। एक मामले में खसरा 30/1 की जमीन शैलजा सिंह पत्नी अरविंद सिंह के नाम और दूसरे मामले में खसरा 347 की जमीन विनेंद्र कुमार जैन के नाम रजिस्ट्री होना बताया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि वह रजिस्ट्री के दौरान न तो मौजूद था और न ही उसने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान लगाया।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसके नाम से एक फर्जी आधार कार्ड तैयार किया गया, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति का फोटो इस्तेमाल किया गया।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि विजय बर्मन नामक व्यक्ति ने उसकी पहचान का इस्तेमाल कर रजिस्ट्री प्रक्रिया में खुद को जिंदा के रूप में प्रस्तुत किया। मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए शिकायतकर्ता ने आधार सत्यापन, ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, फोटो, गवाहों व पहचानकर्ताओं की जानकारी, रजिस्ट्री कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
शिकायत में एक रजिस्ट्री में जमीन की कीमत 16 लाख रुपये बताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे इस राशि में से एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ। शिकायत में चेक के माध्यम से भुगतान किए जाने का उल्लेख करते हुए संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान किसके खाते में गया।
मामले में सबसे बड़ा सवाल रजिस्ट्री के बाद हुई राजस्व कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2025-26 तक राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम दर्ज था, जबकि बाद के रिकॉर्ड में अन्य लोगों के नाम सामने आ गए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि एक तरफ आम आदमी को जमीन के नामांतरण के लिए महीनों तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं इस मामले में कथित फर्जीवाड़े से हुई रजिस्ट्री के चंद रोज बाद ही नामांतरण की प्रक्रिया राजस्व अमले ने पूरी कर दी।
यह गंभीर सवाल है कि जब जमीन मालिक को रजिस्ट्री की जानकारी तक नहीं थी, तो उसकी गैरमौजूदगी में रजिस्ट्री आखिर कैसे हो गई और उसके बाद इतनी तेजी से नामांतरण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि रजिस्ट्री से संबंधित सभी मूल दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज, बायोमेट्रिक व इलेक्ट्रानिक रिकार्ड सुरक्षित रखे जाएं। साथ ही कथित फर्जी पहचान के आधार पर हुए नामांतरण और राजस्व रिकार्ड में किए गए बदलावों की जांच कर उन्हें निरस्त करने तथा जमीन को उसके नाम पर बहाल करने की मांग की गई है।
शिकायत में पहचान की कथित जालसाजी करने वाले व्यक्ति सहित रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर दोष प्रमाणित होने पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन की रजिस्ट्री में वास्तव में किसने किसकी पहचान का इस्तेमाल किया और राजस्व रिकॉर्ड में इतनी तेजी से बदलाव कैसे हुआ।