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एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... 18 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा पलटी, पत्नी की मौत के मामले में पति हुआ बरी

हाई कोर्ट ने हरदा जिले के टिमरनी में पत्नी सुनीता कनेरे की जलकर मौत के मामले में पति अशोक को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 06:49:59 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 06:49:59 PM (IST)
एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला... 18 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा पलटी, पत्नी की मौत के मामले में पति हुआ बरी
18 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा पलटी, पत्नी की मौत के मामले में पति हुआ बरी

HighLights

  1. पत्नी की मौत के मामले में हाई कोर्ट ने पति अशोक को किया बरी
  2. पुलिस जांच में देरी और साक्ष्यों की कमियों पर कोर्ट सख्त
  3. अस्पताल के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मिला न्याय

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने हरदा जिले के टिमरनी में पत्नी सुनीता कनेरे की जलकर मौत के मामले में पति अशोक को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने 13 अगस्त, 2026 को क्रिमिनल अपील में यह फैसला सुनाया। सजायफ्ता अशोक की ओर से अधिवक्ता ईशान दत्त और राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने पैरवी की।

मामले के अनुसार सुनीता की शादी अशोक से 1999 में हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। 20 अगस्त 2008 को सुनीता आग से झुलस गई। अशोक उसे हरदा जिला अस्पताल और बाद में इंदौर के चोइथराम अस्पताल ले गया, जहां 21 अगस्त को उसकी मृत्यु हो गई। ट्रायल कोर्ट ने अशोक को धारा 302 और 498-ए के तहत दोषी ठहराकर उम्रकैद तथा जुर्माने की सजा सुनाई थी।


जांच में मिलीं कई खामियां, ओवरराइटिंग और देरी से दर्ज हुई एफआईआर

जांच में कई खामियां मिलीं। हाई कोर्ट ने पाया कि प्रारंभ में जांच में कोई अपराध नहीं पाया गया था। बाद में घटना के काफी समय बाद गवाहों के बयान दोबारा लिए गए और धारा 306 के तहत एफआईआर दर्ज हुई। घटनास्थल का नक्शा और चूल्हे की जब्ती भी घटना के लंबे समय बाद हुई। दस्तावेजों में तारीखों पर ओवरराइटिंग मिली। विशेषज्ञ रिपोर्ट में मौत का तरीका निश्चित नहीं हो सका।

डॉक्टरों के बयान और मरीज के कथन से संदेह से परे साबित नहीं हुए आरोप

कोर्ट ने यह भी पाया कि पोस्टमार्टम करने वाले डा. भारत बाजपेयी के अनुसार मौत हत्या, आत्महत्या या दुर्घटना-किसी भी कारण से हो सकती थी। चोइथराम अस्पताल की वरिष्ठ सर्जन डा. शोभा चिमनिया के अनुसार भर्ती के समय सुनीता ने बताया था कि खाना बनाते समय चूल्हे की लौ अचानक भड़क गई थी। उसने किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप नहीं लगाया था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच में देरी और साक्ष्यों की कमियों का लाभ अभियोजन को नहीं दिया जा सकता।

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संदेह कितना भी मजबूत हो, प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। अभियोजन हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। लिहाजा अपील स्वीकार कर अशोक को धारा 302, वैकल्पिक 306 और 498-ए के आरोपों से बरी कर दिया गया। अन्य मामले में वांछित नहीं होने पर उसे जेल से रिहा करने के निर्देश दिए गए।