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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Major Operation in Jabalpur Victoria Hospital : सड़ने की कगार पर था लिवर, निडिल से एक लीटर मवाद निकाला, बची जान

विक्टोरिया अस्पताल में इंटरवेंशन रेडियोलाजी शुरू, लिवर एब्सेस से पीडि़त मरीज की जान बचाई

By Mukesh VishwakarmaEdited By: Mukesh Vishwakarma
Publish Date: Thu, 04 Aug 2022 07:56:47 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Aug 2022 07:56:47 AM (IST)
Major Operation in Jabalpur Victoria Hospital : सड़ने की कगार पर था लिवर, निडिल से एक लीटर मवाद निकाला, बची जान

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सड़ने की कगार पर पहुंच चुके लिवर से एक लीटर मवाद निकालकर मरीज की जान बचाई गई। घटना विक्टोरिया अस्पताल के रेडियोलाजी विभाग की है। इस प्रक्रिया के साथ विक्टोरिया में इंटरवेंशनल रेडियोलाजी की शुरुआत हुई। लिवर से मवाद निकालने के लिए मरीज को आपरेशन थिएटर में नहीं ले जाना पड़ा। बिना बेहोश किए तथा चीरा लगाए बगैर यह प्रक्रिया पूर्ण की गई। मवाद भरने के कारण मरीज का लिवर सड़ने की कगार पर पहुंच गया था। अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट व पूर्व सीएमएचओ डा. मनीष मिश्रा ने सोनोग्राफी मशीन की सहायता से इंटरवेंशनल रेडियोलाजी की प्रक्रिया पूर्ण की। मरीज करीब चार माह से लिवर एब्सेस बीमारी की चपेट में है।

यह है मामला-

जानकारी के मुताबिक करीब 50 वर्षीय मरीज को गत दिवस उपचार के लिए विक्टोरिया अस्पताल ले जाया गया था। पेट के एक हिस्से में दर्द के साथ कई दिनों से वह बुखार से पीडि़त था। उल्टी, भूख, थकान, कंपकंपी के कारण वह मजदूरी से भी वंचित हो गया था। जिसके कारण भरण पोषण की समस्या हो गई थी। मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर वह खुद अपना उपचार कर रहा था। विक्टोरिया अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच कर लिवर एब्सेस की जानकारी दी। डा. मिश्रा ने सोनोग्राफी कर बीमारी की पुष्टि की। जिसके बाद इंटरवेंशनल रेडियोलाजी के जरिए उसके लिवर में निडिल डालकर करीब एक लीटर मवाद निकाला।


एब्सेस फटने का खतरा-.

मिश्रा ने बताया कि लिवर एब्सेस संक्रमण के कारण होता है। बैक्टीरिया, पैरासाइट या फंगस के कारण होने वाली इस बीमारी का समय रहते उपचार न होने पर गंभीर खतरा हो सकता है। कई बार एब्सेस लिवर में ही फट जाते हैं। मवाद ह्दय, पेट व फेफड़े में फैल जाती है। कई बार यह स्थिति जानलेवा साबित होती है।

यह प्रक्रिया भी शुरू-

रेडियोलाजिस्ट डा. मिश्रा ने कहा कि विक्टोरिया के रेडियोलाजी विभाग को उन्नत किया जा रहा है। जहां छाती से पानी निकालने, कैंसर की बायप्सी, लिंफनोड बायप्सी आदि सुविधाएं शुरू की जा रही हैं। कैंसर, टीबी आदि बीमारियों से पीडि़त मरीजों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलाजी चीरा रहित प्रक्रिया है। मरीज को आपरेशन थिएटर में भी नहीं जाना पड़ता।