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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का लोकायुक्त पुलिस को आदेश, 24 घंटे में वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए एफआईआर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में लोकायुक्त पुलिस को आदेश जारी कर 24 घंटे के अंदर एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड करने के आदेश दिए है। यह भी कहा गया कि अगर...और पढ़ें

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sat, 31 Aug 2024 01:09:49 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Aug 2024 01:38:35 PM (IST)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का लोकायुक्त पुलिस को आदेश, 24 घंटे में वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए एफआईआर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। फाइल फोटो

HighLights

  1. अभियंता के पद पर पदस्थ सुरेश चंद्र वर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
  2. अनावेदक सुरेश चंद्र वर्मा के विरुद्ध लोकायुक्त ने आरोप-पत्र प्रस्तुत नहीं किया है।
  3. मामले में आरटीआई के तहत आवेदन प्रस्तुत करने पर भी FIR की प्रति नहीं दी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर (MP High Court)। मध्य हाईकोर्ट जबलपुर ने लोकायुक्त संगठन को आदेश दिया है कि 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर एफआईआर अपलोड की जाए। यदि वेबसाइट नहीं है तो राज्य शासन संबंधित प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रकरण में पारित आदेश के पारिपालन में दिशा निर्देश जारी करें।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सचदेवा व न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता राजधानी भोपाल निवासी राजेंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता ध्रुव वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि लोकायुक्त संगठन ने पीडब्ल्यूडी में कार्यकारी अभियंता के पद पर पदस्थ सुरेश चंद्र वर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।


आरटीआई के बाद भी एफआईआर की प्रति नहीं दी गई

अनावेदक सुरेश चंद्र वर्मा के विरुद्ध लोकायुक्त ने आरोप-पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। लोकायुक्त से एफआईआर की प्रति प्राप्त करने के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दायर किया गया था। आरटीआई के तहत आवेदन प्रस्तुत पर भी एफआईआर की प्रति नहीं दी गई।

बावजूद इसके कि सुप्रीम कोर्ट ने यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिका की सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया था कि 24 घंटे के अंदर एफआईआर की प्रति वेबसाइट में अपलोड की जानी चाहिए।

अनावेदक सुरेश चंद्र वर्मा ने आरोप-पत्र दायर नहीं होने के कारण समयमान वेतन वृद्धि का लाभ दिए जाने की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। साथ ही मांग की है कि प्रकरण में लोकायुक्त को शीघ्र जांच पूरी करने के निर्देश जारी किए जाएं।