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एमपी के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाले में छात्रों को बड़ी राहत, अगली परीक्षा में हो सकेंगे शामिल

बताया गया कि अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरण के लिए 4475 पंजीकृत छात्र पात्र पाए गए थे। इनमें 2813 छात्रों ने शिफ्टिंग के लिए पंजीयन...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 09:16:10 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 09:27:23 PM (IST)
एमपी के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज घोटाले में छात्रों को बड़ी राहत, अगली परीक्षा में हो सकेंगे शामिल
एमपी का नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा।

HighLights

  1. अनसूटेबल कॉलेजों के 2935 छात्रों को राहत, परीक्षा में होंगे शामिल।
  2. हाई कोर्ट ने रोके गए परीक्षा परिणाम जारी करने के भी दिए निर्देश।
  3. मामले में कोर्ट ने जानकारी रिकार्ड पर लेते हुए राहत के निर्देश दिए।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कालेज फर्जीवाड़े मामले में हाई कोर्ट ने अनसूटेबल कॉलेजों के जीएनएम पाठ्यक्रम के 2935 छात्रों को बड़ी राहत दी है।

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर गुरुवार को प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने संबंधित छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल करने व रोके गए परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उपमहाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने नर्सिंग काउंसिल की ओर से छात्रों के स्थानांतरण की जानकारी पेश की।

बताया गया कि अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरण के लिए 4475 पंजीकृत छात्र पात्र पाए गए थे। इनमें 2813 छात्रों ने शिफ्टिंग के लिए पंजीयन कराया और 2619 ने च्वाइस फिलिंग की।

इनमें से 2395 छात्रों का सफलतापूर्वक स्थानांतरण हो चुका है। कोर्ट ने जानकारी रिकार्ड पर लेते हुए राहत के निर्देश दिए।

ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों को राहत नहीं

ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कालेजों के छात्रों ने भी आवेदन देकर परीक्षा में शामिल होने और परिणाम जारी करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय समिति ने कॉलेजों को उपयुक्त पाया था और इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर अंतरिम रोक लगाई थी।

इसका विरोध करते हुए बताया गया कि उक्त समिति ने फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं की थी। आरोप है कि कई कालेजों ने फर्जी और डुप्लीकेट फैकल्टी दर्शाकर मान्यता हासिल की थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद इन कॉलेजों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के बाद केवल सूटेबल घोषित कालेज ही संचालन और परीक्षा के अधिकारी होंगे।

आवेदकों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण में आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है। याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पैरवी की। विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।

800 में करीब 600 कॉलेज मिले थे अनुपयुक्त

उल्लेखनीय है कि जनहित याचिका में 2020-21 में खुले नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में करीब 800 कालेजों में से लगभग 600 अनुपयुक्त या गंभीर कमियों वाले पाए गए थे। कई कॉलेजों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, प्रशिक्षित शिक्षकों और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं का अभाव मिला था। कई संस्थान कागजों पर संचालित पाए गए थे।