
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नगर निगम के नक्शा विभाग में भवन निर्माण का नक्शा पास आवेदकों के लिए किसी जंग जीतने से कम नहीं रह गया है। ऑटोमेटिक बिल्डिंग परमिशन एप्रुवल सिस्टम (एबीपीएस-3) लागू कर ये दावा किया जा रहा था कि इस ऑनलाइन व्यवस्था के बाद किसी आवेदक को नक्शा पास कराने नगर निगम मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
30 दिन के भीतर ही आनलाइन नक्शा पास हो जाएगा। लेकिन इस ऑनलाइन व्यवस्था में भी मनमानी का छेद हो गया है। नियम-कायदों के पेंच फंसाकर नक्शे पास नहीं किए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार भवन निर्माण के नक्शे 30 दिनों के भीतर पास हो जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि आवेदन करने के 72 दिन बाद भी चार से छह मंजिला इमारतों के नक्शों की मंजूरी आसानी से नहीं मिल रही है।
भवन निर्माण का भौतिक परीक्षण, ड्राइंग, डिजाइन, प्रकाश विभाग, जल विभाग, अग्निशमन विभाग के अलावा ऐफि-डेफिड के नाम पर इस तरह उलझाया जाता है कि एक समय सीमा के बाद आवेदन कंसलटेंट के कंसोल में ही अटक कर रह गए है। यह ये है कि नगर निगम में अब भी 148 भवन निर्माण की स्वीकृति के आवेदन लंबित है।
शहर के बिल्डरों का कहना है कि कई मामलों में टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से तो लेआउट व अन्य बाहरी स्तर की स्वीकृतियां फिर भी आसानी से मिल जाती है परंतु नगर निगम में आवेदन की प्रक्रिया अटक जाती है। अनावश्यक आपित्तयां लगाकर परेशान किया जाता है। यदि आपत्तियाें का निराकरण कर भी दिया तो टाइम लिमिट बढ़ा दी जाती है। जिसके कारण नगर निगम स्तर पर नक्शों की अंतिम स्वीकृति लंबित रहती है।
जबलपुर क्रेडाई पदाधिकारियों का कहना है कि नक्शा स्वीकृति में विलंब के कारण न केवल बिल्डर प्रभावित है। बल्कि इससे शहर के विकास कार्य, आवासीय परियोजनाएं और रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। निर्माण गतिविधियां धीमी पड़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
निर्माण परियोजनाएं समय पर शुरू न होने से बिल्डरों द्वारा किया गया भारी-भरकम निवेश प्रभावित हो रहा है। बैंक ऋण लेने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शहर के विकास की गति बनाए रखने के लिए नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
जिन नक्शों के आनलाइन आवेदन लंबित हैं उसमें कंसलटेंट स्तर द्वारा सबमिट दस्तावेज में कुछ कमियां हो सकती है। उनके कंसोल में आपत्ति लगाकर वापस कर देते हैं। हमारे कंसोल में कोई आवेदन लंबित नहीं रहता। फिर भी इसकी जानकारी लेकर लंबित आवेदकों को निराकृत किया जाएगा
नवीन लोनारे, भवन अधिकारी नगर निगम
नगर निगम में भवन अनुज्ञा के आवेदन की आनलाइन प्रक्रिया को सरलीकृत किया जाना चाहिए। अब भी कुछ आवेदनों की पेडेेंसी सामने आ रही है। अावदेनों का निराकरण टाइम लिमिट में किया जाना चाहिए।
दीपक अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जबलपुर क्रेडाई