
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के नवागत मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने शुक्रवार को जबलपुर पहुंचकर मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाल लिया। वे मप्र हाई कोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश हैं।
उन्होंने कहा कि मां नर्मदा मध्य प्रदेश से निकलकर गुजरात को भी समृद्ध करती हैं। उसी तरह एक स्थान पर अर्जित अनुभव दूसरे संस्थान को समृद्ध करता है।
न्यायमूर्ति कोगजे ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का पद गर्व और सौभाग्य की बात है, लेकिन उससे बड़ी जिम्मेदारी और कृतज्ञता है। संविधान के तहत मुख्य न्यायाधीश का पद प्रशासनिक आवश्यकता के लिए है। सभी न्यायाधीशों को समान अधिकार प्राप्त हैं। उनका प्रयास रहेगा कि प्रत्येक न्यायाधीश अखंडता, स्वतंत्रता और विश्वास के साथ काम करे।
सीजे ने कहा कि न्याय व्यवस्था के सफल संचालन के लिए अच्छे न्यायाधीशों के साथ अच्छे वकील भी जरूरी हैं। न्याय व्यवस्था में पक्षकार केंद्र बिंदु है और उसे न्याय दिलाना न्यायाधीश तथा अधिवक्ता दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत लोगों का उस पर भरोसा है। इस भरोसे को कायम रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने बार और बेंच के बीच बेहतर संवाद और सहयोग को न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी बताया। कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ उम्मीद लेकर आता है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी, सुगम और समयबद्ध बनाने के लिए सभी पक्षों को अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभानी होगी।
युवा अधिवक्ताओं से अपने वकालत के दिनों का अनुभव साझा करते हुए न्यायमूर्ति कोगजे ने कहा कि कानूनी पेशा एक दिन में नहीं बनता और न ही केवल मुकदमे जीतने से करियर बनता है। इसके लिए तैयारी, समय की पाबंदी, ईमानदारी और प्रतिबद्धता जरूरी है। न्यायालय और प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करने के साथ यह समझना भी आवश्यक है कि कब बोलना है और कब सुनना है।
उन्होंने कहा कि वकील कुछ मुकदमे जीतेंगे और कुछ हारेंगे। कभी न्यायाधीश का निर्णय गलत भी लग सकता है, लेकिन समय के साथ उसकी सही वजह समझ में आ सकती है। यह पेशे का हिस्सा है। जीत के लिए ईमानदारी से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सीजे ने युवा वकीलों से कहा कि पेशे के शुरुआती संघर्ष से घबराने के बजाय लगातार सीखने और तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। प्रत्येक मुकदमा अनुभव देता है और प्रत्येक न्यायिक निर्णय कुछ नया सिखाता है। सफलता के लिए धैर्य जरूरी है, लेकिन पेशे की असली पहचान आचरण से बनती है।
न्यायमूर्ति कोगजे ने युवा अधिवक्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि एक मुकदमा आपको जीत दिला सकता है, लेकिन आपका चरित्र ही आपका करियर बनाता है। उनके अनुसार अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी ईमानदारी, तैयारी और विश्वसनीयता है।
जबलपुर पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश को गार्ड आफ आनर दिया गया। इसके बाद कोर्ट रूम नंबर एक में आयोजित स्वागत समारोह में हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार पदाधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, हाई कोर्ट बार अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह और हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित अन्य वक्ताओं ने सीजे कोगजे के व्यक्तित्व और न्यायिक अनुभव को रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति कोगजे गुजरात हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 1993 में वकालत शुरू करने के बाद उन्होंने सरकारी अधिवक्ता और विशेष लोक अभियोजक के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। अप्रैल 2016 में गुजरात हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और मार्च 2018 में स्थायी न्यायाधीश बने। अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके सामने मुख्यपीठ जबलपुर के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के न्यायिक एवं प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी है।