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सरकारी गलती का आर्थिक बोझ कर्मचारी पर नहीं डाल सकते: एमपी हाईकोर्ट ने रिकवरी रोकने का दिया आदेश

जबलपुर हाई कोर्ट ने वेतन निर्धारण में हुई विभागीय गलती के लिए तृतीय श्रेणी कर्मचारी से रिकवरी करने के राज्य सरकार के प्रयास को खारिज कर दिया।

By Surendra DubeyEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 29 Jun 2026 02:01:08 PM (IST)Updated Date: Mon, 29 Jun 2026 02:01:08 PM (IST)
सरकारी गलती का आर्थिक बोझ कर्मचारी पर नहीं डाल सकते: एमपी हाईकोर्ट ने रिकवरी रोकने का दिया आदेश
MP हाईकोर्ट ने कर्मचारी से रिकवरी पर लगाई रोक (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मनोज कुमार सिंह मामले में आया अहम फैसला
  2. कोर्ट ने रफीक मसीह फैसले का दिया हवाला
  3. राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका हुई निरस्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि विभागीय लापरवाही का आर्थिक बोझ उस कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता, जिसकी वेतन निर्धारण प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं थी।

कोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारियों की गलती का नुकसान तृतीय श्रेणी कर्मचारी से वसूलना उचित नहीं है।

सब-इंस्पेक्टर वेतनमान को लेकर था विवाद

मामला मनोज कुमार सिंह से जुड़ा है। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि सात नवंबर, 2007 के परिपत्र के अनुसार सब-इंस्पेक्टर का संशोधित वेतनमान एक सितंबर, 2007 से लागू होना था। लेकिन मनोज कुमार सिंह को यह वेतनमान एक अप्रैल, 2006 से दे दिया गया था। सरकार का कहना था कि अप्रैल, 2006 से अगस्त, 2007 तक अतिरिक्त भुगतान हुआ, इसलिए उस राशि की रिकवरी की जानी चाहिए।


कर्मचारी की प्रक्रिया में नहीं थी कोई भूमिका

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मनोज कुमार सिंह न तो ड्राइंग-डिस्बर्सिंग अथारिटी थे और न ही वेतन निर्धारण करने वाले अधिकारी। वह केवल तृतीय श्रेणी कर्मचारी हैं। कर्मचारी की ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने पक्ष रखते हुए कहा कि वेतन निर्धारण में हुई गलती के लिए कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले का दिया हवाला

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के रफीक मसीह फैसले का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी कर्मचारी से नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वेतन निर्धारण में कोई गलती हुई है तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी, जिसने प्रक्रिया में त्रुटि की।

सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने माना कि राज्य सरकार की ओर से पुनर्विचार का कोई उचित आधार नहीं बनता। इसी आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका निरस्त कर दी और तृतीय श्रेणी कर्मचारी से रिकवरी के प्रयास को अस्वीकार कर दिया।